Sunday, June 17, 2012

Tumhara chehra - Kusum


 तुम्हारा चेहरा 
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तुम्हारा चेहरा झील जैसा उसमे ये आँखे कमाल है
कभी ये चंचल हो जैसे झरना
इनकी गहराइयो में समुन्दर जैसे उसमे हो उतरना

तुम्हारी आँखे है या जादू की पुडिया
इशारों पे अपनी नाचती है दुनिया
उठती है पलके तो उगता है सूरज

विरानो को छू कर सिखा दे सवारना
सजदे में झुक जाऊ दिल मेरा चाहे
तुम्हारी ये आँखे खुदा की शक्ल है
हुम्हारा चेहरा झील जैसा उसमे ये आँखे कमाल है । 
~~ कुसुम ~~
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Kaanch ka dil hai mera - Bhupendar Kr Panchal

 काँच का दिल हैं घर मेरा
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 ~~ भूपेन्दर कुमार पांचाल ~~
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Ek arsa beet gaya sote hue - Ankita Jain

एक अरसा बीत गया सोते हुए
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एक अरसा बीत गया सोते हुए !
अब तो स्वपन निद्रा से जागो ,
इंतज़ार में है नया सबेरा तुम्हारे,
अब तो उस कुभ्कर्ण से दूर भागो !!

कुछ साल पहले
बनाया था एक संविधान,
गोरों से आज़ाद होकर,
किया प्रजातंत्र निर्माण !
फिर सोये बस ऐसे खोकर,
सब कुछ नेताओं को देकर !
माना की बासठ साल बीत गए
मगर अब भी कुछ उम्मीद बाकि है
बस एक स्वर में ही तो चिल्लाना है
कि सरकार अब भी हमारी है
तो अब सोचने समय न गंवाओ प्यारे
बस तुम दोड़ लगादो !
इंतज़ार में है नया सबेरा तुम्हारे,
अब तो उस कुभ्कर्ण से दूर भागो !!


अरे किस डर दुपकर बैठे हो,
या बस TV पर भाषण के मजे ले रहे हो !
किस ललकार से जागेगा,
पत्थर दिल तुम्हारा !
समझो उनके दर्द को,
जिन्होंने खोया है अपना सहारा !
अन्ना और कुमार सब,
लड़ रहे किसके लिए?
जो घरों में सो रहे
हाथों में रिमोट लिए !
दावा है दानव डर जायेंगे
बस एक साथ चिल्ला दो
इंतज़ार में है नया सबेरा तुम्हारे,
अब तो उस कुभ्कर्ण से दूर भागो !!

~~ अंकिता जैन ~~
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Yun hamse na ruthe zindagi - Ankita Jain

यूँ हमसे न रूठो ज़िन्दगी
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यूँ हमसे न रूठो ज़िन्दगी,
अभी सफ़र बहुत लम्बा है बाकि...
यूँ हमसे न रूठो ज़िन्दगी,
अभी राह बहुत कठिन है बाकि...
तुम न साथ हुईं तो थम जाएँगी
जो गिनी चुनी सांसें हैं बाकि...
तुम ठहरी तो रुक जाएँगी
जो कुछ पल की धड़कन हैं बाकि...
यूँ हमसे न रूठो ज़िन्दगी.............................!!

अभी तो कुछ दिन पहले मैंने,
तुम्हे बहुत समझाया था...
तुम रोयीं थी तो तुमको मैंने,
प्यार से गले लगाया था...
फिर क्या बदला है आज और कल मैं,
या कल का गुस्सा ही है बाकि...
यूँ हमसे न रूठो ज़िन्दगी,
अभी सफ़र बहुत लम्बा है बाकि...
यूँ हमसे न रूठो ज़िन्दगी...............................!!

अच्छा बैठो तुम्हे याद दिलाऊँ,
बीते कल का वो एक किस्सा...
जिसमे हम तुम पास थे कितने,
खुशियाँ थीं हर पल का हिस्सा...
माना कि वो बीता कल था,
पर आने वाला कल है बाकि...
यूँ हमसे न रूठो ज़िन्दगी,
अभी सफ़र बहुत लम्बा है बाकि...
यूँ हमसे न रूठो ज़िन्दगी................................!!

चलो आज, एक वादा कर दूँ,
कि तुम्हे कभी रोने न देंगे...
माना कि है कठिन निभाना,
पर टूटे न ये दुआ करेंगे...
अब तो हंस दो मान भी जाओ,
पोंछ लो आँखें जो नमी है बाकि...
यूँ हमसे न रूठो ज़िन्दगी,
अभी सफ़र बहुत लम्बा है बाकि...
यूँ हमसे न रूठो ज़िन्दगी..................................!!
 
~~ अंकिता जैन ~~
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Sarhad - Ankita Jain


सरहद 
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सरहद की हर हद पर तुम हो,
दुश्मन की हर जिद पर तुम हो !
लेते हैं जो स्वतंत्र सांस हम,
उस हर सांस के रक्षक तुम हो !

कभी कारगिल में रखवाली,
या हो बम्बई की गोली-बारी !
इनसे जो बेफिक्र बनाये,
उस हर सोच के रक्षक तुम हो !

धरती कांपे या आये सुनामी,
हो जीवन की आँखों में पानी !
हर मुश्किल से राहत देकर,
उस राहत के रक्षक तुम हो !

करते हैं झुककर सलाम हम,
तुम हो तो न कभी गुलाम हम !
कभी जो खाए डर हम सब को,
उस ज़ालिम डर के भक्षक तुम हो !

~~ अंकिता जैन ~~
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Saturday, June 16, 2012

suraj ne kaha - Ankita Jain "Bhandari"

सूरज ने कहा
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सूरज ने कहा उस बदरी से,
              ज़रा अपनी रजाई तो हटाओ !
सारी रात तेरे आघोष में सोया हूँ,
               अब तो मेरे रंगों को बिखराओ !
खिलने जाने दो मेरी ये धूप,
               तड़प रही है जिसे पाने को धरती !
पिघल जाने दो ये ओस की बूँदें ,
               जो सारी रात है तुमने बिखेरी  !
बाकि हैं खिलनी अभी,
                मेरे इंतज़ार में कलियाँ !
सुबह की राह तकती,
                सूनी पड़ी हैं गलियां !
ना फैलाओ ये अँधियारा,
               होकर यूँ उदास !
मैं फिर वापस आऊंगा,
               अब थोड़ा तो मुस्कुराओ !
सूरज ने कहा उस बदरी से,
              ज़रा अपनी रजाई तो हटाओ !!


~~ अंकिता जैन "भंडारी "~~
 

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Wednesday, June 13, 2012

Yeh dil - Kusum


यह दिल
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बहुत सी बाते ऐसी है जो अनकही रह गई, सोचते ही रहे गए गर कह न सके

जो बात दिल की थी दिल में ही रह गई।

समय के चक्र से इस तरह बदली तस्वीर, कि न चाहते हुए भी वह बदल कर रह गई,

चाह जिसे अपने से भी ज्यादा, उसी ने दिल दुखाया बहुत ज्यादा

कह गए वह बात ऐसी, दिल में लगी आग जैसी, न चुभे सोचकर भी गर चुभ गई ।

आँखों में आये आंसू दिल में टीस उठी, आँखों कि नमी बस आँखों में रह गई ।

बहुत सी बाते ऐसी है जो अनकही रह गई।

अगर हम दूसरे थे तो दूसरे ही रह जाते, उस समय क्यों दिल लगाया था

क्यों उस में हमारे अरमानो का दिया जलाया था ।

क्या हम ही मिले तुम्हे दिल से खेलने के लिए जो तुम खेले और खेल कर चले गए ।

गर मालूम होता कि ऐसा होगा, न हम यह दिल लगाते न ही जख्म पाते

जिस तरह जी रहे थे उसी तरह जी जाते , अब तो यह आलम है न जीते है न मरते है ।

इस कदर हम अपनी खामोशियाँ हम से रूठ जाए,

खेले खूब हंसी के साथ, दिल में रहे न कोई आस ।


~~ कुसुम ~~
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Kuch Pal Ki Khusiya - Kuldeep Sahoo


Kuch Pal Ki Khusiya - Kuldeep Sahoo

Poet : Kuldeep Sahoo

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kuch pal ki khushiya thi wo jo unki ankho se jhalaki thi

kuch pal ki jhushiya thi eo jinse hui unki ankhe halki thi

kuch pal ki khushiya thi wo jin ke sahare hum ji rhe the

kuch pal ki khushiya thi wo jinke liye ham har gam pi rhe the

agle kuch pal me lag gayi un khushiyo ko kisi ki najar

agle kuch pal me hone lga un khushiyo pr asr

jo the dil k kareeb wo jane lage dur

jinke the dil majboot wo bhi padne lage kamjor

ankhe kar rhi thi baya jo unke dil ka haal tha

ladte jhagadte unse beet gya 1 sal tha

har ek anshu kar rha tha hale dil baya

har ek ulfat ko akele le kar use mila kya???


kuch pal ki khushiya thi wo jinka mujhe intjar tha

kuch pal ki khushiya thi wo jinse mjhe pyar tha

kuch pal ki khusiya thi wo jinhone cheena mera karar tha

kuch pal ki khushiya thi wo jinke liye mai bekrar tha

kuch pal beete akhiri din aya

kuch pal beete uski yado ne mjhe sataya

kuch pal beete to thi wo bhi presan

kuch pal beete use rota dekh tha mai bhi hairan

pahli bar the uski ankho me anshu mere liye...

judayi k dard se the uske chehre k rng ude hue

dil me tha drd pr dil me tha karar

wo ankho k samne thi par bhi thi takrar

kuch pal ki khushi thi wo jiske liye thi wo milne ko taiyar

kuch pal ki khushi thi wo jisse mjhe ho gya tha pyar

kuch pal ki khushi thi wo jisne mjhe moda har bar

kuch pal ki khushi thi wo jiske liye bhul gaye the ham apni takrar

Poet : Kuldeep Sahoo

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Woh Khwab meri - Avaneesh Gahoi


वो ख्वाब मेरी 
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कभी परी तो कभी अप्सरा है,

कभी दुआ तो कभी दवा है

कभी तपिश तो कभी सर्द हवा है.
कभी दिल में होती है तो कभी नजर में,
कभी यादों में तो कभी ख्वाबो मैं.
कभी जानी-पहचानी है तो कभी अनजानी सी
थोड़ी पगली सी है, थोड़ी दीवानी सी.
कभी पल्लवी सी है तो कभी पंखुड़ी सी,
थोड़ी नाजुक सी है बहुत प्यारी सी.
न जाने वो ऐसी है या सिर्फ मुझे लगती है,
मगर जो भी है बहुत अपनी सी लगती है.
न जाने ये सच है या सिर्फ एक ख्वाब है
वो दूर होकर भी मेरे बहुत पास है |
~~ अवनीश गहोई ~~
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Fasale - Avaneesh Gahoi

 
फासले 
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कल फिर आई थी तुम ख्वाब में,
 
कोहरे से ढकी किसी सुबह में,
 
ओस की बूंदों सी थी तुम या सूर्य की किरण सी,
 
पल्लवी सी थी तुम या किसी परी सी,
 
वही मुस्कान थी चेहरे पर आँखों में फिर चमक थी,
 
खामोश मैं था और तुम भी चुप थी,
 
बातें तो बहुत थी पर शब्द कम थे,
 
दूर हम नहीं थे पर फासले बहुत थे.
 
देख कर तुम्हे, मैं खुश भी बहुत था,
 
दिल में उमंग थी आँखों में फिर नशा था,
 
कुछ दूर मैं चला था पर साथ तुम नहीं थे,
 
दूर हम नहीं थे पर फासले बहुत थे.....
 
 
~~ अवनीश गहोई ~~
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Jab Talak - Avaneesh Gahoi


जब तलक
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जब तलक है धड़कन दिल में,

जब तलक है रूह जिस्म में,
 
जब तलक मुखातिब है मेरी नजर नजारों से,
 
जब तलक है सूरज की रौशनी चाँद की चांदनी,
 
जब तलक है जहाँ में हवा और पानी,
 
जब तलक तेरी सीरत है पाक और तुझे है मेरी याद,
 
तब तलक मेरी मुहब्बत,
 
मेरे सीने में है तेरे लिए
 
चाहत इज्ज़त और मुहब्बत बस तब तलक.
 
अवनीश गहोई
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