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Friday, October 25, 2013

Maa - Vivekanand Joshi

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  माँ
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तू उम्मीद है
 तू हि धूप है
 तेरा ही ये जहाँ
 "तुझ से ही तो मैं हूँ माँ"
                    तुझ से ही तो मैं हूँ माँ
                    तू ही है खुशी
                    तू ही है हँसी
                    एक पल को भी रूठे मुझसे
                   वो दिन अब तू कभी ना लाना
                   तू ही है मेरी दुनिया
                  "तुझ से ही तो मैं हूँ माँ"
 तू एह्सास है
 जिसके आगे शब्दों ने भी सर झुकाया
 और मैं बस इतना ही कह पाया
 कि तेरा साया रहे सदा
 आखिर "तुझ से ही तो मैं हूँ माँ"

- विवेकानन्द जोशी

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Sunday, June 17, 2012

Maa - Mukul Sharma

माँ
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जब कभी मैं..माँ के विषय में..
लिखने का विचार करता हूँ...तो जैसे...
शब्द भी डरने लगते है...
अक्षर सब क्षरने लगते है....
और कहते है मुझसे...कि...
अस्तित्व का वर्णन हो सकता है...
पर माँ को... कौन वर्णित कर सकता है...?
संतो-अरिहंतो की दुआ होती है...
बुद्धो की जैसे पनाह होती है....
पूछे जब कोई... मैं क्या उपमा दूं....?
माँ तो बस.....माँ होती है.....

याद है वो दिन...जब मेरे होश में...
माँ ने मुझे पहली बार चूमा था....
स्तब्ध थी धडकने....
विराम लगा था विचारों पे...जैसे...
बाकी बस तारो को छूना था....
मेरे थोड़े से दुःख पे.... वो पलके भिगो ले...
पर खुद के लिए... वो कहाँ रोती है.....?
माँ तो बस......

मौन का संगीत है.....माँ....
खुदा की जैसे प्रीत है...माँ...
बरसात में मिटटी की खुशबु है...माँ...
बस याद करो...हर सू है...माँ...
चैतन्य-मीरा का नृत्य है...माँ...
इस देह में जैसे...वो सत्य है...माँ...
हम पत्ते तो जैसे डाली है...माँ...
पीरो की कब्बाली है...माँ...
अस्तित्व में है उसीका..अनुसरण...
कुछ ऐसी ही ..निराली है...माँ...
जब रख दे वो हाथ सर पे....
जैसे जादू सा कर देती है....
माँ तो बस.........
होती ही ऐसी है ।।

~~ मुकुल शर्मा ~~ 
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Tuesday, March 1, 2011

Maa - Ankita Jain

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माँ - अंकिता जैन
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उसकी हर धड़कन में होता है सिर्फ तुम्हारा नाम ,
शायद ही कोई लम्हा ना लिया हो तेरा नाम !

अपने आंसुओं को छुपाकर तुम्हारी खुशियों को महकाया है उसने ,
उसकी दुनिया में होते हैं सिर्फ तुम्हारी आँखों के सपने !
तुम्हारी हंसी की किलकारियां महकाती हैं उसका आँगन ,
तुम्हारी आँखों के आंसू भिगो देते हैं उसका मन !

वो तो होती है ममता की मूरत ,
जिसकी आँखों में होती है सिर्फ तुम्हारी सूरत !
तुम्हारी फर्मायिशों से बढ़कर ना समझा कभी कोई दूसरा काम ,
उसकी हर धड़कन में होता है सिर्फ तुम्हारा नाम !!

तुम्हारी गल्तियों पर वो नाराज़ भी होती है ,
पर तुम्हे रुलाकर चुपके से खुद भी रोती है !
जाते ही तुम्हारे नज़र उसकी द्वार पर होती है ,
और वापसी की खबर से उसकी खुशियाँ दुगनी होती हैं !

हर दुःख से परे होता है माँ का आँचल ,
तुम्हारी आँखों की चमक होती है उसकी आँखों का काजल !
तुम्हारी एक मुस्कराहट होती है उसका मुकाम ,
उसकी हर धड़कन में होता है सिर्फ तुम्हारा नाम !!

~~ अंकिता जैन ~~

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