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Wednesday, June 11, 2014

Matdan - Mamta Sharma

"मतदान "
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अपनी ढपली , अपना राग ,
बेसुरी धुन व बेसुरी तान, 
फिर से वही गवैये आये,
फिर  मतदान के दिन हैं आये। 

जगह -जगह बरसाती मेंढक ,
निकल आये मेढ़ों पर चढ़ कर ,
जाने कैसे गीत ये गायें ,
फिर मतदान के दिन हैं आये। 

वही  पुरानी चित - परिचित धुन,
अपनी मैं -मैं ,दूजों की  चुप,
लीपा -पोती सीख के आयें ,
फिर मतदान। ……। 

लिए आये फिर धूर्त चरित्र ,
माला फूलों के वही चित्र ,
हार में खुद को हार  ना जाएँ  ,
फिर मतदान के। ……। 

जगह जगह फिर उत्स खड़ा है ,
मतदाता वीभत्स खड़ा है ,
अक्ल पे धुंध व् बादल छाये ,
फिर मतदान। … 

कुत्ते -बिल्ली , शेर -बिलाव ,
लड़ें ज्जोर व् फेंकें दाव ,
शर्म को ताक पे ही धर आये ,
फिर मतदान। … 

रंक महीपति सभी खड़े हैं , 
क्षेत्र छोड़ कहीं दूर लड़े है ,
सामने से वो भिड़ने जाएँ।,
फिर मतदान  ..........   

कोई लल्ला , कोई अल्ला वाले ,
बड़े ठगों के हैं कोई साले ,
सबका माल पेट में जाए ,
फिर मतदान। .... 

हरदम हल्ले , हरदम रैली ,
दुनिया भीतर -बाहर मैली ,
आम - ख़ास कुछ समझ ना पाये ,
फिर मतदान के दिन हैं आये। 

जरा अगर देश कि होती ,
फिर यूं त्राहि -त्राहि न होती ,
बच्चे भूखे ही सो जाएँ ,
फिर मतदान। .... 

जन -जन पे रोटी जो होती , 
शिक्षा की सोटी जो होती ,
ओ प्रभु दिन ये क्यूँ दिखलाये ,
फिर मतदान के दिन हैं आये। 

देश की  बेटी लाज जो होती , 
युवकों में कुछ लाज जो होतीं ,
देश को दिन फिर ही लग जाएँ,
फिर मतदान 

चुनो जरूर सब देख - परख के ,
मत देना सब आँख में रख के ,
फिर से देश शिखर पे जाए 
फिर मतदान। .... 

लाईन लगेगी , छुट्टी होगी ,
घर में खीर , बाहर भी होगी,
सभी चलो मिल बाँट के खाएं ,
फॉर मतदान। … 

आह !ये कैसा शुभ दिन आया ,
सारी खुशियां  संग ही लाया,
वोटर जब से हैं बन पाये ,
फिर मतदान। … 

पंडित ,मोची ,धोबी , नाई ,
मास्टर , क्लर्क ,बढ़ई , हलवाई , 
सभी एक संग हैं लो आये ,
फिर मतदान। .......   

नंदी -भाभी ,सास बिदक गईं ,
मित्र -पड़ोसन भी लो भिड़ गईं ,
काहे को जी राड़ बढ़ाएं ,
फिर मतदान के। … 

मन्नत तीरथ व्रत हैं बोले , 
बाला जी, पुष्कर ,या भोले ,
तीरथ भजन कुछ काम न आये ,
फिर मतदान। ………  

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ममता शर्मा 

Friday, October 25, 2013

Pukaar - Kusum

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पुकार 
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सुनों देश के लाल ये माँ तुम्हे पुकारती,
जुल्मो से दबी हुई ऐ दर्द से कराहती,
कब तक सोओगे अब तो तोड़ दो इस निद्रा को,
जागो और देखो कैसे रौंद रहे है इस माँ के सीने को,
किसी ने छोड़ा धर्म, तो किसी ने संस्कार को,
कोई तोड़े देश को तो कोई माँ के प्यार को,
कोई माँ की आबरू को पैसों में है तोलता,
कोई सिंदूर पोछता तो कोई आंचल को नोचता,
कोई लूटता खसोटता कोई खून चूसता,
आबरू लुट रही तेरी माँ की देख
क्यों खून पानी हो गया क्यों आता नहीं उसमे उबाल,
क्यों गहरी नींद सोया है मेरे लाल,
क्या बात है जो तू खामोश है,
माँ की आत्मा झकझोरती और धिक्कारती
उठा ले क्रांति की मशाल ये माँ तुम्हे पुकारती
सुनो सुनो सुनो ये माँ तुम्हे पुकारती,

- कुसुम 
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Friday, August 17, 2012

Apna watan - Kusum

अपना वतन 
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अपनी जमीन अपना गगन , बहती सुगन्धित मोहक पवन

इसके नज़ारे चुराता है मन, सबसे प्यारा है अपना वतन
उत्तर में इसके हिमालय खड़ा, दक्षिण में सागर का पहरा अड़ा
पूरब में इसके खाड़ी बड़ी , पश्चिम में अर्णव करे चौकसी
हम तो सभी से इतना कहे हिन्दू मुसलमान मिल के रहे
नफरत की आंधी अब न चले प्रेम का दरिया दिल में बहे
अब वतन में रहे बस अमन हर बुलंदी पे चढ़ता रहे अब वतन
लक्ष्य से विचलित ना हो मन रखना सुरक्षित अपना वतन
शत्रु की चाल को करके विफल दिखला देगे हम अपना बाहुबल
बस लबो पे रहे हरदम सबसे प्यारा है अपना वतन
सबसे प्यारा है अपना वतन सबसे न्यारा है अपना वतन
इसके चरणों में मेरा नमन इसपे वारेगे हम जान ए तन
अपना वतन अपना वतन सबसे प्यारा है अपना वतन

जयहिंद जयभारत !!


-       कुसुम 

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Thursday, June 21, 2012

Hindustan khatarein me - Dr. Pawan Kr "Bharti"

हिंदुस्तान खतरें में
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~~~ डॉ पवन कुमार " भारती " ~~~
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