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आदत सी हो गयी हैं
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दर्द सहने की आदत सी हो गयी हैं,
खामोश रहने की आदत सी हो गयी हैं!
अब बह भी जाने दो इन आंसूओ को,
इनको तो बहने की आदत सी हो गयी हैं!!
दर्द सहने की.............
रोज वही कहा-सुनी-शिकायतो के मेले ,
वो रोज के बेचैन मंझर झगडे ओ झमेले!
रोज के उन तानो की जरुरत सी हो गयी हैं,
अब तो ये झिल्लत भी शराफत सी हो गयी हैं!!
दर्द सहने की.............
दिल लगाना , प्यार करना, फिर उसी को तोडना !
पहले तो ठुकरा देना, फिर उसी के पीछे दौडना!!
जैसे मोह्ह्बत भी विरासत में मिल गयी हैं,
अब तो प्यार की बाते भी तिजारत सी हो गयी हैं!!
दर्द सहने की आदत सी हो गयी हैं,
खामोश रहने की आदत सी हो गयी हैं!
~~ अस्मिता ~~
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