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Saturday, May 21, 2011

Tum Saath Ho - Gaurav Mani Khanal

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    तुम साथ हो...
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जब कभी भी तुम याद आते हो,
होठो पर मुस्कान,
आखो मे नमी छोड़ जाते हो,
किये थे वादे कितने,
बैठ तारो के संग,
उन ही तारो के साथ बैठाता हु  आज भी,
यकीं है मुझको आते हो तुम हार रात,
बैठने मेरे संग,
भुलाए नही भूलता तुम्हारे यादो का रंग,
मनाये नही मानता मन मेरा की तुम नही मेरे संग,
आगंन की तुलसी मे दिया आज भी जलाता हु,
जानता हु मे आते हो तुम हर सुबह,
मागने दुआ मेरे संग,
बगीचे के फूल आज भी महकते है,
खिलते गुलाब तेरी याद दिलाते है,
बारिश  की बूंद आज भी मन को भाती है,
नाचता हु आज भी मे इन बूंदों के संग,
जानता हु मे आते हो तुम हर सावन,
भीगने बारिश मे मेरे संग,
लोग कहते है तुम अब नही रहे,
मे कहता हु ऐसा कोई पल नही जब संग तुम नही हो,
नादान है नही जानते प्यार क्या होता है,
प्यार केवल संग मे नही प्यार तो विरह मे भी होता है,
वो क्या प्यार करेंगे जो साथ छुटने से टूट जाते है,
प्यार तो वो करते जो प्रियतम के यादो के साथ ही पूरी जिंदगी जी लेते हे,
तुम नही मोजूद यहाँ ये हकीकत हे दुनिया के लिए,
पर मुझे नही कोई मतलब दुनिया की इस हकीकत से,
मैंने  तो रखा हे तुम्हे छुपा के आपने दिल मे,
तुम सदा वही रहोगे  बन दिल की धडकन मेरे लिए...

      ~ गौरव मणि खनाल~

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