नारी शक्ति
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कभी हारती हूँ, कभी गिरकर संभालती हूँ,
डरती भी हूँ पर मुश्किलों से निकलती भी हूँ !
बस करो अब और न दो नाम कमजोरी का ,
मानो या न मानो पर तेरे इस जीवन की दायनी हूँ !!
कभी जो हो शक मेरी शक्ति का ,
तो पलट लेना इक बार पन्ने इतिहास के !
संघार किया है दुष्ट दानवो का ,
कभी मैं दुर्गा तो कभी काली भी हूँ !!
ना करना बात अब रुकने की मुझसे,
छूना है मुझे भी अब उस आसमा को !
शक हो इस पर भी तो पूछ लो अन्तरिक्ष से,
मिली थी उससे रूबरू मैं इसी कल्पना हूँ !!
है विनती आज मेरी बस इतनी सी,
ना मारो मुझे और ले लेने दो सांसे !
रोक दो ये अनर्थ वरना देखोगे एसा कल भी,
जब तुम लेना चाहो जीवन और मैं ना रहूँ !!
~~ अंकिता जैन ~~
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