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Friday, October 25, 2013

Patjhad - Kusum

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 पतझड़
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जब तुम हम से मिले तो ऐसा लगा
मानो जीवन में बाहार आ गई
जैसे कलि खिल कर फूल बन गई
चारो ओर खुशियों की हरियाली थी
आकाश में छाई लाली थी

हम मदहोश थे तेरी आहोश में
न खबर थी दिन और रात की
चारो ओर प्यार ही प्यार का डेरा था

तुम क्या गए कि मानो जिंदगी वीरान हो गई
बहारो कि जगह ली पतझड़ ने
कलि फूल बन कर बिखर गई
चारो और छाया दुखो का कोहरा

कभी सोचते है कि तुम हमारे जीवन में न आते
न ही बाहार आती न ही पतझड़ लाती
फिर भी पतझड़ में सावन का दीदार करते है
हर घड़ी सिर्फ तेरा इंतज़ार करते है

_________कुसुम________

Tuesday, September 18, 2012

Saavan Geet - Mamta Sharma

सावन
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लो सावन आया ,लो सावन आया

जो बारिश पड़ी झड़ी झड पड़ी ,
जो सिमटी पड़ी कली खिल पड़ी.
लो सावन आया हाँ सावन आया 


में सोई पड़ी जो उठ हुई खडी 
अचानक जोरों की बरखा पड़ी 
ये मन घबराया जी मन घबराया 
लो सावन आया हाँ सावन आया 

जो दृष्टि पड़ी कहीं पर खडी 
कोई चुलबुली सी डाली अड़ी
जो गीत सुनाया जी गीत सुनाया 
लो सावन आया हाँ सावन आया 

अचानक कहीं जो बिजली पड़ी 
कड़कती बड़ी ना रूकती झड़ी 
ये तेरी है माया जी तेरी है माया 
लो सावन आया हाँ सावन आया 

~~ ममता शर्मा ~~
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Friday, August 17, 2012

Bula lo in megho ko - Mamta Krishnatrey

"बुला ले इन मेघों को "
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सूर्य तूने सोख - सोख नीर बना मेघों को ,
भेजा कहाँ बता अब ,बता दे इन मेघों को

भेज उन तक एक पाती ,
अपनी धरती प्यासी
तनिक ज़ोर डांट लगा
बुला ले इन मेघों को

घनन  घनन घनन करें
सुनने को  मन तरसे
कहाँ जाय मुए बरसे
बुला ले इन मेघों को

धरा बनी बंजर है
कृषक सब ही बेघर हैं
बिके ग्राम खेतन हैं
बुला ले इन मेघों को

बाढ़ों को वहीँ छोड़
नदियाँ से मुख को मोड़
सागरों से नाता तोड़
बुला ले इन मेघों को

खेतिहर तो नष्ट हुए
जमींदार भ्रष्ट हुए
जन-जन को कष्ट हुए
बुला  लें मेघों को

पाईप लाइन सूख गई
पोर - पोर चूस गई
टेंकर पे लूट भई
बुला ले इन मेघों को

कुछ  तो तू कर मदद
तू ही तो एक अदद
क्यूंकर होगी रसद
बुला  ले इन मेघों को

बहना की शादी खड़ी
कुल की मर्याद बड़ी
विकट घडी आन पड़ी
बुला ले इन मेघों को

बच्चे खड़े आस करें
बरसो ! पुकार करें
बड़े कैसे प्यार करें
बुला ले इन मेघों को

मंदिर के ठाठ बढे
पंडित के भाग चढ़े
लूटन को माल खड़े
बुला ले इन मेघों को

गर ना तू पुकारेगा
सावन भी हारेगा
भादों तो मारेगा
बुला ले इन मेघों को

जाने ना दे मेघों को
खींच लें मेघों को
धर पकड़ इन मेघों को
बुला ले इन मेघों को

कैद कर इन मेघों को
बरसन दे मेघों को
जाने ना दे मेघों को
बुला ले इन मेघों को


- ममता कृष्णात्रेय