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Thursday, July 4, 2013

Antim Vriksh - Devendra Sharma

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अंतिम वृक्ष 
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सहसा बोला वह एकांत,
सौंदर्यहीन तथा क्लेश-क्लांत,
वह शक्तिहीन, वह मानहीन,
वह दुखी दुखी अति दीन-हीन,

प्रकृति सुंदरी का वह श्रृंगार,
मानव-कर्मों से दुखी अपार.
हाँ तरु कहो या उसे पेड़,
मानव जीवन की वह है मेड़,

पर आज स्वयं यह रोता है,
जब मानव जन सोता है,
यह है धरती का अंतिम वृक्ष,
है मानवता को प्रश्न यक्ष,

क्यों कट गए इसके सब साथी,
लाशों पर चलते बाराती,
पर आज मशीने आई हैं,
संहार साथ वो लायी हैं,


बन गया तथापि क्रूर दानव,
कल  तक था जो कभी श्रेष्ठ मानव..

देवेन्द्र शर्मा 
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Tuesday, March 8, 2011

Maanav Kaaya - Ankesh Jain

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मानव काया

अंकेश जैन
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कुछ तत्वों का संगम है

कुछ नियमो की शक्ति है

मानव काया इस श्रृष्टि की

एक अनोखी गुत्थी है


आयामों की सीमा में यह

सदा मध्य में आती है

जितनी छोटी आकाश गंगा से

अणु को उतना पीछे पाती है


सदियों के विकसित क्रम का यह

परिणाम अनोखा लगता है

रहे समय के किसी दौर में

सदा ज्ञान को तकता है


भाव, बिभाव, शक्ति, सौन्दर्यता

जीवन के आयाम यहाँ

ध्येय ज्ञान है, लक्ष्य ज्ञान है

जीवन में विश्राम कहा

~~ अंकेश जैन ~~
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