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Monday, September 17, 2012

Naadan Khamoshi - Rishish Dubey

नादान खामोशी 
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जहाँ शोर है वहां तू ही तू 
तू मिले तो हो शुरू गुफ्तगू
तेरा घर कहाँ, क्या तेरा पता
सच सच बता, सच सच बता
कभी आके तू मुझसे भी मिल
ये आरज़ू करे मेरा दिल
की मुझको बता दे राज़ वो 
जो दबी सी है इक बात वो
तू चुप है मगर ये शोर क्यूँ
खीचें मुझे सब ओर क्यूँ 
सब ओर क्यूँ सब ओर क्यूँ
अब कैसे हो 'राही' बेखयाल 
ज़िन्दगी कई सवालों का जाल
सीने में है तूफ़ान सा
हर पल लगे बेईमान सा
सब मिट गया सब मिट गया
धोखा हुआ मैं लुट गया 
ये भाग दौड़ ये जुस्तजू 
कामयाबी का जूनून 
हार जीत की आरजू 
मुझको नहीं, मैं क्या करूँ
मैं क्या करूँ मैं क्या करूँ
बस हुआ मैं थक गया
तू नहीं मिली मैं जहाँ गया
जवाब भी मुझको बता
अपने दिए सवालों का
क्यूँ चुप है इस तरह
असली क्या है चेहरा तेरा
मुझे यूँ तनहा न कर
ढूँढता तुझे फिर रहा
आ भी जा अब आ भी जा 
ऐ नादान ख़ामोशी 
ऐ नादान ख़ामोशी 
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