Showing posts with label inspiration. Show all posts
Showing posts with label inspiration. Show all posts

Thursday, June 27, 2013

Amrit Kalash baat do jag me - Anand Vishwas

===========================================
अमृत-कलश बाँट दो जग में
===========================================

अगर हौसला तुम में है तो,
कठिन नहीं है कोई काम।
पाँच - तत्व के शक्ति - पुंज,
तुम सृष्टी के अनुपम पैगाम।

तुम में जल है, तुम में थल है,
तुम में वायु और गगन है।
अग्नि-तत्व से ओत-प्रोत तुम,
और सुकोमल मानव मन है।

संघर्ष आज, कल फल देगा,
धरती की शक्ल बदल देगा।
तुम चाहो तो इस धरती पर,
सुबह सुनहरा कल होगा।

विकट समस्या जो भी हो,
वह उसका निश्चित हल देगा।
नीरस जीवन में भर उमंग,
जीवन जीने का बल देगा।

सागर की लहरों से ऊँचा,
लिये हौसला बढ़ जाना है।
हो कितना भी घोर अँधेरा,
दीप ज्ञान का प्रकटाना है।

उथल-पुथल हो भले सृष्टि में,
झंझावाती तेज पवन हो।
चाहे बरसे अगन गगन से,
विचलित नहीं तुम्हारा मन हो।

पतझड़ आता है आने दो,
स्वर्णिम काया तप जाने दो।
सोना तप कुन्दन बन जाता,
वासन्ती रंग छा जाने दो।

संधर्षहीन जीवन क्या जीवन,
इससे तो बेहतर मर जाना।
फौलादी ले नेक इरादे,
जग को बेहतर कर जाना।

मानव-मन सागर से गहरा,
विष, अमृत दोनों हैं घट में।
विष पी लो विषपायी बन कर,
अमृत-कलश बाँट दो जग में।

~~ आनन्द विश्वास ~~ 

============================================

Saturday, May 11, 2013

Prayatn - Abhishek

 प्रयत्न 
__________________________

मंजिले खोयी नहीं जाती, धुंधलाती रोशनी-ए-मशालो में ,
इश्क भुलाया नहीं जाता, साकी के पैमानों में |
समुद्र का सूरज तो रोज पानी में डूब के भी ऊपर आता है
क्यूंकि जिंदगी हारी नहीं जाती, उम्र के ढलानों में ||

उम्मीदें टूट जाती है विलापो से, ख़ुशी के ठहाको से नहीं ,
जंग जीती जाती है वफ़ा से, सैन्य लड़ाको से नहीं |
चक्रव्यूह के दरवाजो पर चाहे बैठा दो, दस महारथी,
अभिमन्युं के भेदन से कोई बच  सकता नहीं | 

सब कुछ हार गए तो क्या, क्यूँ तुम निराश हो |
सृष्टि थी समाप्त, जब जग था पूर्ण जल मग्न ,
क्या हारे थे मनु, भूल कर पुनःसृजन का स्वप्न,
उठो, स्मरण रहे मनु पुत्र हो तुम , तुम मनुष्य हो ||

शत प्रयत्न असफल हुए; तो क्या , तुम नही असफल हो |
भागीरथ रुक जाते, तो वंचित रह जाता जग भागीरथी के अवतरण से|
बुझते दिए की लौ भी आंखिरी सांस चीख के लेती है,
छोड़ असफलता का मोह, मनुज, अनिराश तू फिर प्रयत्न कर ||


__________________________

Mujhko itni himmat dilwa de - Ajay Tiwary


मुझको इतनी हिम्मत दिलवा दे +
______________________________________

कोलाहल से ऊपर उठती हो
ऐसी बुलंद आवाज़ दिलवा दे|
उल्टी धार में भी मुझको
पतवार चलाना सिखला दे|
रेंग रहा हूँ पृथ्वी पर कब से
मुक्त आकाश की पतंग बनवा दे|
मुझको इतनी हिम्मत दिलवा दे|

आलोचनाओं के झंझावातों में भी
सिर ऊंचा रखना सिखला दे|
मुश्किलों के अंधड़ में भी
वक्ष खोल चलना सिखला दे|
अत्याचारों को सहने की
कायरता से मुक्ति दिलवा दे|
मुझको इतनी हिम्मत दिलवा दे|

सच को सच कह पाऊँ जो
ऐसी अद्भुत शक्ति दिलवा दे|
रिपु को गले लगा लूँ  जो
ऐसी चमत्कारिक युक्ति बतला दे|
तुझसे विश्वास न हटे कभी
ऐसी अविराम भक्ति दिलवा दे|
मुझको इतनी हिम्मत दिलवा दे|

दुर्गम पथरीली राहों पर निर्भय
आगे बढ़ने के गुर बतला दे|
प्यार की खातिर ग़म सहने का
पर्वतसम सम्बल दिलवा दे|
उगते सूर्य की प्रथम रश्मि का
एक अग्रणी अश्वारोही बनवा दे|
मुझको इतनी हिम्मत दिलवा दे|



दुखियारों के दुख में हमदम हो
आँसू दो बहाना सिखला दे|
कृत्रिमता में जकड़े जग में
पुनः बाल्यसम किलक बँटवा दे|
अपनी कमियों पर हँस कर
अपनाने का रज सिखला दे|
मुझको इतनी हिम्मत दिलवा दे|

~~ अजय तिवारी ~~

______________________________________

Monday, September 17, 2012

Pyaas Barkarar Rakh - Ashish Pant

प्यास बरकरार रख
_____________________

धूप हो कड़ी तो क्या            
तीरगी घनी तो क्या
लक्ष्य का अमृत भी तू            
पायेगा पर इतना तो कर
प्यास बरकरार रख            
तू प्यास बरकरार रख

मंजिलें कभी कभी                
अदृश्य जो लगें तुझे
तू तनिक आराम कर              
एक गहरी सांस भर
आस बरकरार रख                  
तू प्यास बरकरार रख

राह हो, थकान हो                      
बाधाएँ तमाम हों
नींद भी गर ले पथिक                     
जगे हुए ख्वाब संग
रास बरकरार रख                             
तू प्यास बरकरार रख

हाँ, छूटते हैं आसरे                       
हाँ, छूटते हैं काफिले
पर सांस छूटने तलक                    
दिल में हौसलों का तू
वास बरकरार रख                   
तू प्यास बरकरार रख

बस धड़कने से ही नहीं                   
दिल हो जाता दिल है
आदमी बने इन्सान                       
इसीलिए दिल में तू
आभास बरकरार रख                      
तू प्यास बरकरार रख

हर हर्फ़ में जो पीड़ हो                           
वक़्त गूढ़ गंभीर हो
फीके क्षणों की धार में                             
थोड़ी हँसी को घोल के
परिहास बरकरार रख                           
तू प्यास बरकरार रख

गुलशन जब बेनूर हो                           
और वसंत कुछ दूर हो
क्रूर खिज़ाओं में डटकर                         
अपनी आरजूओं के
अमलतास बरकरार रख                          
तू प्यास बरकरार रख

नौ भावों से है बना
ये ज़िन्दगी का चित्र है                            
इक भी कम नहीं पड़े
खुद में नवरसों का तू                        
एहसास बरकरार रख
तू प्यास बरकरार रख                       

कल  ही कल की नींव था
कल ही कल का सार है                         
कभी भी ये भूल मत
भविष्य को तू साध पर                         
इतिहास बरकरार रख
तू प्यास बरकरार रख                        

पहले वार में कहाँ                    
कटे कभी पहाड़ हैं
हर नदी मगर मिली                  
अन्तः अपने नदीश से
बस, प्रयास बरकरार रख                  
तू प्यास बरकरार रख

~~ आशीष पंत ~~
_____________________

Sunday, June 17, 2012

Ek naya sehar - Ankit Jain

एक नया सहर 
__________________

जीवन में विफलताओं का दौर देख घबराना नहीं,
कर सफलता की ओर प्रस्थान, रुकना – थकना कहीं नहीं,
अपने मकसद में तू उत्साह का नया संचार कर,
कि हर स्याह रात् के बाद आएगा एक नया सहर.

मन का विकास कर, रख सदा शुद्ध आचरण,
समाज राष्ट्र के कल्याण के लिए कर अपना जीवन समर्पण,
गुरुओं के चरणों में पड़ सद्गुणों को ग्रहण कर,
कि हर स्याह रात् के बाद आएगा एक नया सहर.

अगर हो तेरी राहों में हजारों मुसीबतों का आगमन,
करना तू हर ऐसे शत्रुओं का अद्वितीय साहस से  दमन,
होगा भविष्य सुनहरा राह को सुगम कर,
कि हर स्याह रात् के बाद आएगा एक नया सहर.


ध्रितराष्ट्र जैसे अपाहिजों के लिए तू बन उनका संजय,
भला करेगा उनका तो न देखेगा कभी पराजय,
विजय पथ पर आगे बढ़  उद्धार  वस्त्र पहनकर,
कि हर स्याह रात् के बाद आएगा एक नया सहर.

मुसीबतों को देख कम न पड़े कभी तेरा जोश,
किन्तु सफलता को नजदीक देख खो न देना होश,
सकारात्मक बन जी ले जीवन का हर एक प्रहर,
कि हर स्याह रात् के बाद आएगा एक नया सहर

~~ अंकित  जैन  ~~
__________________


Thursday, April 7, 2011

Ji Le Phir Zindagi - Ankita Jain

______________________________

 जीले फिर ज़िन्दगी - अंकिता जैन "भंडारी"
______________________________


हो न तू उदास और होसला न खो,
होते नहीं मायने बसंत के गर पतझड़ न हो !

बन जाओ बागवां अपने जीवन की बगिया के,
महकादो रंग बिरंगे फूल खुशियों के ,
पर न होना उदास जब काटें आयें,
होते नहीं मायने गुलाब के गर काटें न हों !

समेट ले अब बिखरी खुशियाँ कुछ इस तरह,
पिरोये हों माला में फिर मोती जिस तरह,
पर न होना कभी उदास गर फिर वो धागा टूटे,
होते नहीं मायने बुलंदी के गर कमजोरी न हो !

दुनिया के इस सागर में सबको तेरा मान,
ना बांध रिश्तों को बंधन में, ना पराया जान,
मुस्कुरादे कुछ ऐसे की वो किसी की ख़ुशी बन जाये,
होते नहीं मायने मुस्कान के गर आँसूं ना हों !

~~ अंकिता जैन "भंडारी" ~~
______________________________