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Friday, October 25, 2013

Prasang - Adarsh Tiwary

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    प्रसंग
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लफ़्ज़ों में इज़हार करना चाह रहा था जिन बातों को,
उस जज़्बात के मायने मेरे लिए बड़े ख़ास थे,
इशारे काफी थे समझाने को,
पर सुनने वो लफ्ज़ तुम वही मेरे साथ थे।

धीमी धीमी बूंदों की बारिश,
बरश रही थी नन्ही बूंदे
कर रही थी श्रृंगार तेरा,
मृगनैनी पलकों के तेरे ।

चिन्हित करे सौंदर्य को ,ऐसी सकशियत तेरी,
मुख दर्शाती स्वप्नसुंदरी, रंग तेरा सुनेहरा
कमल पंखुड़ी से पवित्र तू, मन चुलबुल अति चंचल ,
हर बात में तेरी सोच सही, सलाह भाव अति गहरा ।


कैसे करू मैं पहल, बुनू शब्दों के जाल संग तेरे,
जानता हु तेरे दिल का राज़ पर  कैसे निकालू तुमसे वो बात
तेरे भी नज़रिए में अपने को तौलना बड़ा ज़रूरी था,
तुमने जो संकेत दिए, वो भाव नित नृत्य मयूरी था ।

स्वाभाविक विचार सामान, सम्मान था मेरे प्यार को
अत्यंत मतभेद के पार , मुझे मेरा नया संसार स्वीकार था ।।

 - आदर्श तिवारी
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Wednesday, June 13, 2012

Jab Talak - Avaneesh Gahoi


जब तलक
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जब तलक है धड़कन दिल में,

जब तलक है रूह जिस्म में,
 
जब तलक मुखातिब है मेरी नजर नजारों से,
 
जब तलक है सूरज की रौशनी चाँद की चांदनी,
 
जब तलक है जहाँ में हवा और पानी,
 
जब तलक तेरी सीरत है पाक और तुझे है मेरी याद,
 
तब तलक मेरी मुहब्बत,
 
मेरे सीने में है तेरे लिए
 
चाहत इज्ज़त और मुहब्बत बस तब तलक.
 
अवनीश गहोई
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Thursday, January 12, 2012

Fool Aur Kaata - Kusum

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फूल और काँटा
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फूल और काँटा
जन्म लेते है एक ही जगह
एक ही पौधा उन्हें है पालता
उन पर चमकता सूर्य भी एक सा
एक सी वह किरणे है डालता
रात में उन पर चमकता चाँद भी एक सा
एक सी वह चांदनी है डालता
मेघ भी उन पर बरसता एक सा
एक सी उन पर हवाएँ भी बही |

एक ही पौधे से लेकर जन्म भी
पर कर्म उनके होते नहीं एक से
छेद कर काँटा किसी की अंगुलियाँ
फाड़ देता है किसी का वर-वसन
फूल लेकर तितलियों को गोद में
भौरों को अपना अनूठा रस पिला
एक खटकता है सबकी आँख में
दूसरा सदा देवो के सर चढ़ा |

था वही आकाश, किरणे थी वही
सूर्य दोनों के लिए था एक ही
भिन्न थे पर भाव उनके
इसलिए उनकी दशा भी भिन्न थी
ऐ हमारे देश के प्यारे युवक
ठीक ऐसा ही तुम्हारा हाल है
दृष्टी तुम पर पड़ रही संसार की
इस तरफ भी क्या तुम्हारा ख्याल है |

~~ कुसुम ~~
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Saturday, May 21, 2011

Shabdo ki paribhasha - Vikas Chandra Pandey

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शब्दों की परिभाषा - विकाश चन्द्र पाण्डेय
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कुछ रिश्तो की परिभाषा अलग सी होती हैं ,
अधुरें ख्वाबो की अधूरी कहानी होती है .
चाहता हु इन्हें शब्दों में पिरोना ,
पर कुछ यादें रोकती है.

इस परिभाषा की भी एक अलग ही दिशा है ,
इन अनकही बातों की भी एक वजह है .
चाहता हूँ इन यादों को भुलाना,
पर कुछ बातें रोकती है.

सभी ख्वाब कभी पुरें नहीं होते ,
परछाइयों के कभी चेहरे नहीं होते.
चाहता हु इन खाव्बों को पूरा करना,
पर कुछ रातें रोकती है.

शायद इस परिभाषा में कुछ अधूरापन हो,
या फिर मेरी अशिमित सोच का प्रवाह हो.
पर वो बातें आज भी गूंजती है,
वो यादें आज भी याद आती है.
वो सपने आज भी जगातें है ,

वो अनकही बातें आज भी मेरी गलतियां याद दिलाती है.
चाहता हु इन्हें आज भी सुधारना,
पर अब उसकी खुशियाँ मुझे रोकती है.
उसकी दुनिया मुझे रोकती है....

'' विकास चन्द्र पाण्डेय ''
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Kabhi Samjha Hi Nahi - Gaurav Mani Khanal

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कभी समझा ही नहीं...
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प्यार को मेरे तुने कभी समझा ही नहीं,
निगाहों को मेरे तुमने पढ़ा ही नही,
मेरे दिल की धडकन है तू,
पर इस दिल की आवज़ को तुमने कभी सुना ही नही,
न कह सका मुझे प्यार है तुमसे,
और मेरी खामोशी को तुमने समझा ही नही,
मैंने तो तुमको आपना रब माना,
पर मेरे ऐतबार को तुमने कभी समझा ही नहीं,
तुम समझे मे छोड़ चला तुम्हारा साथ,
मुड़कर एक बार भी पीछे देखा ही नहीं,
आज भी लिए निगाहों मे प्यार के मोती खड़ा हु मै उसी मोड़ पर,
पर मेरे इंतजार को तुमने कभी समझा ही नहीं,
मेरी हर साँस मे तुम्हारे लिए दुआ है,
मेरी इबादत को तुमने कभी माना ही नहीं,
चल दिए रूठ कर हमसे तुम इस कदर,
याद फिर हमको कभी किया ही नहीं,
सपने मे भी नही देखा हमने किसी और का चेहरा,
तड़प को मेरे कभी तुमने समझा ही नहीं,
प्यार को मेरे तुमने कभी समझा ही नहीं...

~गौरव मणि खनाल~

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Tum Saath Ho - Gaurav Mani Khanal

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    तुम साथ हो...
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जब कभी भी तुम याद आते हो,
होठो पर मुस्कान,
आखो मे नमी छोड़ जाते हो,
किये थे वादे कितने,
बैठ तारो के संग,
उन ही तारो के साथ बैठाता हु  आज भी,
यकीं है मुझको आते हो तुम हार रात,
बैठने मेरे संग,
भुलाए नही भूलता तुम्हारे यादो का रंग,
मनाये नही मानता मन मेरा की तुम नही मेरे संग,
आगंन की तुलसी मे दिया आज भी जलाता हु,
जानता हु मे आते हो तुम हर सुबह,
मागने दुआ मेरे संग,
बगीचे के फूल आज भी महकते है,
खिलते गुलाब तेरी याद दिलाते है,
बारिश  की बूंद आज भी मन को भाती है,
नाचता हु आज भी मे इन बूंदों के संग,
जानता हु मे आते हो तुम हर सावन,
भीगने बारिश मे मेरे संग,
लोग कहते है तुम अब नही रहे,
मे कहता हु ऐसा कोई पल नही जब संग तुम नही हो,
नादान है नही जानते प्यार क्या होता है,
प्यार केवल संग मे नही प्यार तो विरह मे भी होता है,
वो क्या प्यार करेंगे जो साथ छुटने से टूट जाते है,
प्यार तो वो करते जो प्रियतम के यादो के साथ ही पूरी जिंदगी जी लेते हे,
तुम नही मोजूद यहाँ ये हकीकत हे दुनिया के लिए,
पर मुझे नही कोई मतलब दुनिया की इस हकीकत से,
मैंने  तो रखा हे तुम्हे छुपा के आपने दिल मे,
तुम सदा वही रहोगे  बन दिल की धडकन मेरे लिए...

      ~ गौरव मणि खनाल~

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Wednesday, April 27, 2011

Saccha Pyaar - Omprakash Maandar


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सच्चा प्यार - ओमप्रकाश मांदर
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दौलत भी मिली हमे, शोहरत भी मिली हमे,

फिर भी इस दिल को करार नहीं मिला |
बहुत कुछ मिला तेरे जाने के बाद हमे,
पर कहीं भी तेरे जैसा प्यार नहीं मिला |

नकली सी हंसी मिली, झूठी सी ख़ुशी मिली,
पर पहले जैसा कहीं संसार नहीं मिला |
बहुत कुछ मिला तेरे जाने के बाद हमे,
पर कहीं भी तेरे जैसा प्यार नहीं मिला |

इस जहाँ में मित्र बनाए हमने बड़े,
बड़ी निभाई हमने यारियां |
क्या कहें कुछ ऐसे भी मिले हमे,
जो चलाते थे दिल पर आरियाँ |


बड़े इंसान भी मिले, कुछ बेईमान भी मिले,
पर तेरे जितना ऊँचा दिलदार नहीं मिला |
बहुत कुछ मिला तेरे जाने के बाद हमे,
पर कहीं भी तेरे जैसा प्यार नहीं मिला |
ए दिल - सच्चा प्यार नहीं मिला ||

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Chahat Ki Tapish - Ankita Jain (Bhandari)


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चाहत की तपिश - अंकिता जैन
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निकलता है लेकर चाहत-की-तपिश,
कि कभी तो उसका दीदार होगा !
पूरी होगी इन निगाहों की ख्वाहिश,
और पलकों को आराम होगा !

गुज़रता है वक़्त पर जब,ना मिलती कोई आहट !
तो बेसब्र किरणों में भी ,बड़ती है गर्माहट !!
सुलझा सा मन अब बसेरा उलझे ख़यालों का होगा,
मिलेगा दीदार या फिर आलम बेवफ़ाई का होगा !
पूरी होगी आखों की ख्वाहिश और पलकों को आराम होगा !!

अब तक ना आई, कोई खबर !
सिमटने लगी है अब, हर तरफ बिखरी नज़र !!
पर वो दीवाना आज फिर यही कहकर आख़िरी साँस लेगा -
मेरे इंतज़ार का सिलसिला ना कभी ख़तम होगा!
कल आऊंगा फिर इसी उम्मीद में उसका दीदार होगा !!
पूरी होगी आँखों की ख्वाहिश और पलकों को आराम होगा !!

~~ अंकिता जैन~~
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Tuesday, April 12, 2011

Saare Bandhan Tod Ke - Abhishek "Shekher"

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सारे बंधन तोड़ के तुझको आना होगा आज प्रिये 
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सारे बंधन तोड़ के तुझ को आना होगा आज प्रिये ,
सारे बंधन तोड़ के तुझ को आना होगा आज प्रिये ....
कितनी रातें करवट लेकर जगा हूँ तेरी यादों मैं,
तड़प नज़र आती है तेरी प्यारी प्यारी सी बैटन मैं ,
मुझे पता है तुमको दर है अपने पकडे जाने से ,
पर यह बाद्नामी अच्छी होगी घुट घुट के मर जाने से ,
पाप नहीं यह पुण्य प्रवाह है क्यों करती हो लाज प्रिये,
सारे बंधन तोड़ के तुझको आना होगा आज प्रिये |

मैं हूँ भाषा ,तुम हो शैली | तुम नैया, पतवार हूँ मैं ,
तुम हो रंग किसी मूरत का , और उसका आकर हूँ मैं ,
विरह की अग्नि मैं साँसें सांस नहीं ले पति हैं,
तुम हो मेरा प्यार प्रियतम और तुम्हारा प्यार हूँ मैं,
बिन उल्फत कहे की साँसें , बिन योवन कहे का जीवन,
बिन तेरे कहे की उल्फत बिन तेरे कहे का योवान ,
योवन की इस सारंगी पर छेड़ो तो कोई साज़ प्रिये ,
सारे बंधन तोड़ के तुझको आना होगा आज प्रिये |

ऐ चाँद सुनो तुम मेरा कहना ,  आज ज़रा खामोश ही रहना,
विरह की लम्बी साड़ों का पूरा होना है एक सपना ,
वो जब आयें छुप जाना तुम , देख हमें न ललचाना तुम ,
हम निकलें हैं प्यार को पाने , एक दूजे मैं गम हो जाने ,
तुम क्या जानो मदहोशी को , दिल की बातें दिल ही जाने ,
एक दूजे मैं खो जाने का कर दो अब आगाज़ प्रिये ,
सारे बंधन तोड़ के तुझ को आना होगा आज प्रिये |


~~ अभिषेक जैन "शेखेर" ~~

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Thursday, April 7, 2011

Darta hoon main - Gaurav Mani Khanal


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डरता हु मैं
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कहता नहीं किसी से,
डरता हु 
मैं
 आपने आप से,
नहीं बोलता हु 
मैं
 आपने ही दिल से,
डरता हु मैं इस दिल की चाहत से,

मन तो बहुत करता है बनाऊ कोई  दोस्त,
पर डरता हु 
मैं
 दोस्त की बेवफाई से,
नही बोलता हु 
मैं
 किसी अनजान से,
डरता हु किसी को आपना बनाने से,

प्यार नही करता किसी से,
डरता हु दिल टूटने के दर्द से,
नही जानता विश्वास का मतलब,
डरता हु इस दगाबाज़ ज़माने के चालो से,

नही चाहता मुस्कुराना है,
डरता हु हँसी के पीछे छुपे गम से,
नही जानता जीतना मै,
डरता हु हार के लम्बे हाथो से,

खुल के जीना भूल गया है,
डरता हु काल की मार से,
भूल गया जिंदगी के मायने मै,
डरता हु आने वाले कल के भार से,

भावहीन है चेहरा मेरा,
डरता हु कोई पढ़ ना ले डर को मेरे,
शब्द नही है मेरे मन के कोष मे,
डरता हु मन की वेदना किसी को कहने से,

डरता हु मै हार पल के बदलाव से,
जीवन परिवर्तन के सिधांत से.....

~ गौरव मणि खनाल~
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Aao Na Mitwa - Hari Prasad Sharma

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आओ ना मितवा - हरि प्रसाद शर्मा 
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आओ ना मितवा अभी मन है प्यासा,
रुको जब तक हलचल है, जीवित है आशा |

यमुना का तट था औ कदम्बो की डाली,
बिन राधा थे बैठे जहा श्याम खाली,
बरनिया के कुंजो मे झूल थे हम तुम,
उन सखियों से छिपकर मिले भी थे आली |

तब पूनम की रातो में संग-संग विचरना,
वो फूलो की सेजों पे खुद में सिमटना,
वो कंपते से अधरों पे प्यार की वर्षा,
याद है वो दोनों का एक होकर मिलना |

याद है वो स्वप्निल सी भीगी-भीगी राते ,
तुमने लिखे ख़त और मीठी-मीठी सी बाते,
जाओ ना मितवा अभी मौसम है प्यारा,
अकेले खेल में झेलूँगा, रोज शह और माते |

आओ ना मितवा अभी मन है प्यासा,
रुको जब तक हलचल है,जीवित है आशा ||

~~ हरि प्रसाद शर्मा ~~
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Thursday, March 24, 2011

Tere Bina Main tanha - Gaurav Mani Khanal


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तेरे बिन मे तनहा..
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           फिर आई रात तनहा,
           जगमगाते तारे अनेक पर शांत चद्रमा तनहा,
           और उस दुध्लाती रौशनी मे,
           तनहा चाँद तो निहारता मेरा मन तनहा,

           तरो की टीम टीम की बीच,
           भुझा भुझा मेरा दिल तनहा,
           और इस जगमगाती महफ़िल मे,
           तेरे हाथो का साथ खोजते मेरे हाथ तनहा,

           ठंडी मधुर पुर्वा के साथ आई तेरी खुशबू,
           तेरे ही ख्यालो मे डूबे मन को कर गयी तनहा,
           और इस मनोरम बेला मे,
           तेरा साथ खोजती मेरे दिल की धड़कन तनहा,

           यु तो है सब संगी साथी मेरे साथ,
           पर जैसे एक राधा के बिन गोपियों के बीच श्याम तनहा,
           एसे ही  तेरा ना होना प्राण प्रिये ,
           कर देता है मुझको तनहा,

           लौट आओ प्रियतम जल्दी,
           तुम बिन हो गए है मेरे सपने भी तनहा,
           नैनो मे तुम्हारी चाहत इस कदर बसी है,
           दिन हो या रैन केवल तुम्हारी रहा तकते है ये तनहा...

--
~~गौरव मणि  खनाल~~

Aadat si ho gayi hai - Asmita

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आदत सी हो गयी हैं

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            दर्द सहने की आदत सी हो गयी हैं,
            खामोश रहने की आदत सी हो गयी हैं!
            अब बह भी जाने दो इन आंसूओ को,
            इनको तो बहने की आदत सी हो गयी हैं!!
                         दर्द सहने की.............

            रोज वही कहा-सुनी-शिकायतो के मेले ,
            वो रोज के बेचैन मंझर झगडे ओ झमेले!
            रोज के उन तानो की जरुरत सी हो गयी हैं,
            अब तो ये झिल्लत भी शराफत सी हो गयी हैं!!
                         दर्द सहने की.............

            दिल लगाना , प्यार करना, फिर उसी को तोडना !
            पहले तो ठुकरा देना, फिर उसी के पीछे दौडना!!
            जैसे मोह्ह्बत भी विरासत में मिल गयी हैं,
            अब तो प्यार की बाते भी तिजारत सी हो गयी हैं!!
            दर्द सहने की आदत सी हो गयी हैं,
            खामोश रहने की आदत सी हो गयी हैं!
                                                               

~~ अस्मिता ~~
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Tutata Khwab - Ankita Jain


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टूटता ख्वाब - अंकिता जैन (भंडारी)
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आये  थे  वो   मेरी  ज़िन्दगी  में , एक  हसीं  सपने  की  तरह .
कुछ  पल  ठहरे  और  चले  गए ,
ओस  की  बूंदों  की  तरह .
क्या  गिला  करें  उनसे  ,
जब  हमे  किस्मत  ने  दगा  दिया .
और  समझकर  हसीं  ख्वाब
उसने  हमे  भुला  दिया .
था  वफाओं  का  जो  महल  ढहा ,
ताश  के  पत्तों  की  तरह .
आये  थे  वो  मेरी  ज़िन्दगी  में , एक  हसीं  सपने  की  तरह .

नादाँ  है  ये  दिल  कहता  है ,
वो  वापस  आयेंगे .
सीने  से  लगाकर  मुझे  अपने
हर  शिकवे  को  मिटायेंगे .
कैसे  यकीन  दिलों  इसे  की ,
उसने  तो  हमे  भुला  दिया .
और  एक  पल  में  अपने  से
बेगाना  बना  दिया .
बिखर  गयी  हर  उम्मीद  आज ,
रेट  के  टीले  की  तरह .
आये  थे  वो  मेरी  ज़िन्दगी  में , एक  हसीं  सपने  की  तरह .


~~ अंकिता जैन (भंडारी) ~~

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