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Wednesday, June 13, 2012

Woh Khwab meri - Avaneesh Gahoi


वो ख्वाब मेरी 
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कभी परी तो कभी अप्सरा है,

कभी दुआ तो कभी दवा है

कभी तपिश तो कभी सर्द हवा है.
कभी दिल में होती है तो कभी नजर में,
कभी यादों में तो कभी ख्वाबो मैं.
कभी जानी-पहचानी है तो कभी अनजानी सी
थोड़ी पगली सी है, थोड़ी दीवानी सी.
कभी पल्लवी सी है तो कभी पंखुड़ी सी,
थोड़ी नाजुक सी है बहुत प्यारी सी.
न जाने वो ऐसी है या सिर्फ मुझे लगती है,
मगर जो भी है बहुत अपनी सी लगती है.
न जाने ये सच है या सिर्फ एक ख्वाब है
वो दूर होकर भी मेरे बहुत पास है |
~~ अवनीश गहोई ~~
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Fasale - Avaneesh Gahoi

 
फासले 
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कल फिर आई थी तुम ख्वाब में,
 
कोहरे से ढकी किसी सुबह में,
 
ओस की बूंदों सी थी तुम या सूर्य की किरण सी,
 
पल्लवी सी थी तुम या किसी परी सी,
 
वही मुस्कान थी चेहरे पर आँखों में फिर चमक थी,
 
खामोश मैं था और तुम भी चुप थी,
 
बातें तो बहुत थी पर शब्द कम थे,
 
दूर हम नहीं थे पर फासले बहुत थे.
 
देख कर तुम्हे, मैं खुश भी बहुत था,
 
दिल में उमंग थी आँखों में फिर नशा था,
 
कुछ दूर मैं चला था पर साथ तुम नहीं थे,
 
दूर हम नहीं थे पर फासले बहुत थे.....
 
 
~~ अवनीश गहोई ~~
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Jab Talak - Avaneesh Gahoi


जब तलक
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जब तलक है धड़कन दिल में,

जब तलक है रूह जिस्म में,
 
जब तलक मुखातिब है मेरी नजर नजारों से,
 
जब तलक है सूरज की रौशनी चाँद की चांदनी,
 
जब तलक है जहाँ में हवा और पानी,
 
जब तलक तेरी सीरत है पाक और तुझे है मेरी याद,
 
तब तलक मेरी मुहब्बत,
 
मेरे सीने में है तेरे लिए
 
चाहत इज्ज़त और मुहब्बत बस तब तलक.
 
अवनीश गहोई
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Meri Maa - Avaneesh Gahoi


मेरी माँ
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मेरे जन्म के साथ ही वो औरत से बनी थी माँ ,
और अपनी आँखों से देखा था मैंने उन्हें पहली बार.
जिनकी कोख मैं बिताए थे मैंने नौ महीने,
उनसे था ये मेरा पहला साक्षात्कार .

उन्होंने ही दिया था मुझे अच्छे बुरे का ज्ञान,
और कराई प्रकृति से मेरी पहचान
कभी गुस्से में जो मारा था मुझे थप्पड़,
 तो गीला हो गया था तकिया उनका |
और थप्पड़ मारने का दर्द,बह रहा था आंसुओं में ,
मैंने सीखा था उस रोज एक नया सबक,
और जाना माँ के गुस्से में भी है ममता,बीमारी मैं दवा है माँ का स्पर्श,
मुश्किल मैं उनका साथ है मेरी सबसे बड़ी ताकत |

माँ की खूबियों को मैं शब्दों में पिरो नहीं सकता,
माँ के ऋण से मैं कभी मुक्त हो नहीं सकता |
वो धरती पर भगवन हैं मेरे लिये,
बिन मांगे जो देती हैं वरदान सदा |

उनके होंठों पर दुआ है मेरे लिये और आँखों में कामयाबी के सपने,
ईश्वर ने दी है उन्हें सृजन करने की अद्भुत क्षमता,और असीमित धैर्य भी
मैंने उने बहुत है जगाया और सताया,अब चाहता हूँ मैं बस इतना विधाता,
न बनूँ कारण कभी उनके कष्ट का, न हों आंसूं उन आँखों में मेरी वजह से.
कायम रहे उनके चेहरे की मुस्कान सदा,और न ही कभी कम हो उनके प्रति श्रद्धा.

अवनीश गहोई

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