Showing posts with label patriotic. Show all posts
Showing posts with label patriotic. Show all posts
Thursday, June 21, 2012
Sunday, June 17, 2012
Sarhad - Ankita Jain
सरहद
_______________
सरहद की हर हद पर तुम हो,
दुश्मन की हर जिद पर तुम हो !
लेते हैं जो स्वतंत्र सांस हम,
उस हर सांस के रक्षक तुम हो !
कभी कारगिल में रखवाली,
या हो बम्बई की गोली-बारी !
इनसे जो बेफिक्र बनाये,
उस हर सोच के रक्षक तुम हो !
धरती कांपे या आये सुनामी,
हो जीवन की आँखों में पानी !
हर मुश्किल से राहत देकर,
उस राहत के रक्षक तुम हो !
करते हैं झुककर सलाम हम,
तुम हो तो न कभी गुलाम हम !
कभी जो खाए डर हम सब को,
उस ज़ालिम डर के भक्षक तुम हो !
दुश्मन की हर जिद पर तुम हो !
लेते हैं जो स्वतंत्र सांस हम,
उस हर सांस के रक्षक तुम हो !
कभी कारगिल में रखवाली,
या हो बम्बई की गोली-बारी !
इनसे जो बेफिक्र बनाये,
उस हर सोच के रक्षक तुम हो !
धरती कांपे या आये सुनामी,
हो जीवन की आँखों में पानी !
हर मुश्किल से राहत देकर,
उस राहत के रक्षक तुम हो !
करते हैं झुककर सलाम हम,
तुम हो तो न कभी गुलाम हम !
कभी जो खाए डर हम सब को,
उस ज़ालिम डर के भक्षक तुम हो !
~~ अंकिता जैन ~~
_______________
Labels:
Ankita Jain,
bhandari,
hindi kavita,
hindi poem,
patriotic,
sarhad
Thursday, January 12, 2012
Ek Vidambana Badi - Bhuwan Mehta
____________________
एक विडंबना बड़ी
____________________
कैसे समझाऊं तुम्हे अपना ये भारत मैं
यह देश है एक विडंबना बड़ी
होती है यहाँ हर रोज, हर तरफ महाभारत
पर हरण को तन पर चीर नही
उन्नति का गुमान करें, पर विकास का हमें भान नही
हर आबाद दिल्ली पर यहाँ बिछते है भोपाल कई
टूटती सड़कों पर भी करते हैं चक्के जाम
अंधेरे गाँवों में जलती यहाँ धर्म-जाति की आग
बाज़ारों का देश है ये, बिकाऊ लोकतंत्र, कॉमनवेल्थ तक यहाँ
महेंगे ये बाजार है, सस्ते जान और मोबाइल यहाँ
आख़िर कैसे करूँ इस देश को मैं परिभाषित
जहाँ ना अल्लाह की बाबरी हुई, और ना अयोध्या का राम हुआ
कैसे समझाऊं तुम्हे अपना ये भारत
यह देश है एक विडंबना बड़ी, एक विडंबना बड़ी...
~~ भुवन मेहता ~~
____________________
Labels:
Bhuwan Mehta,
Ek Vidambana Badi,
patriotic,
एक विडंबना बड़ी,
भुवन मेहता
Saturday, December 24, 2011
Mere desh ki maati sona - Anand Vishwas
_______________________________________
मेरे देश की माटी सोना
_______________________________________
मेरे देश की माटी, सोना, सोने का कोई काम ना.
जागो भैया भारतवासी, मेरी है ये कामना.
दिन तो दिन है, रातों को भी, थोडा-थोडा जागना,
माता के आँचल पर भैय्या ,आने पावे आँच ना.
अमर धरा के वीर सपूतो, भारत माँ की शान तुम,
माता के नयनों के तारे. सपनों के अरमान तुम.
तुम हो वीर शिवा के वंशज, आजादी के गान हो,
पौरुष की हो खान, अरे तुम, हनुमत से अनजान हो.
तुमको है आशीष राम का, रावण पास ना आये,
अमर प्रेम हो उर में इतना, भागे भय से वासना.
आज देश का वैभव रोता, मरु के नयनों मे पानी है,
मानवता रोती है दर - दर,उसकी भी यही कहानी है.
उठ कर गले लगा लो तुम, विश्वास स्वयं ही सम्हलेगा,
तुम बदलो भूगोल जरा, इतिहास स्वयं ही बदलेगा.
आड़ी - तिरछी मेंट लकीरें , नक्शा साफ बनाओ,
एक देश हो, एक वेश हो, धरती कभी न बाँटना.
गैरों का कंचन माटी है, देश की माटी सोना.
माटी मिल जाती माटी में, रह जाता है रोना.
माटी की खातिर मर मिटना, माँगों को सूनी कर देना,
आँसू पी - पी सीखा हमने, बीज शान्ति के बोना.
कौन रहा धरती पर भैय्या, किस के साथ गई है,
दो पल का है रेंन बसेरा, फिर हम सबको भागना.
हम धरती के लाल, और यह हम सबका आवास है.
हम सबकी हरियाली धरती, हम सबका आकाश है.
क्या हिन्दू, क्या रूसी चीनी, क्या इंग्लिश अफगान,
एक खून है सबका भैय्या , एक सभी की साँस है.
उर को बना विशाल ,प्रेम का पावन दीप जलाओ,
सीमाओं को बना असीमित, अन्तःकरण सँवारना.
मेरे देश की माटी, सोना ...........
~~ आनंद विश्वास ~~
जागो भैया भारतवासी, मेरी है ये कामना.
दिन तो दिन है, रातों को भी, थोडा-थोडा जागना,
माता के आँचल पर भैय्या ,आने पावे आँच ना.
अमर धरा के वीर सपूतो, भारत माँ की शान तुम,
माता के नयनों के तारे. सपनों के अरमान तुम.
तुम हो वीर शिवा के वंशज, आजादी के गान हो,
पौरुष की हो खान, अरे तुम, हनुमत से अनजान हो.
तुमको है आशीष राम का, रावण पास ना आये,
अमर प्रेम हो उर में इतना, भागे भय से वासना.
आज देश का वैभव रोता, मरु के नयनों मे पानी है,
मानवता रोती है दर - दर,उसकी भी यही कहानी है.
उठ कर गले लगा लो तुम, विश्वास स्वयं ही सम्हलेगा,
तुम बदलो भूगोल जरा, इतिहास स्वयं ही बदलेगा.
आड़ी - तिरछी मेंट लकीरें , नक्शा साफ बनाओ,
एक देश हो, एक वेश हो, धरती कभी न बाँटना.
गैरों का कंचन माटी है, देश की माटी सोना.
माटी मिल जाती माटी में, रह जाता है रोना.
माटी की खातिर मर मिटना, माँगों को सूनी कर देना,
आँसू पी - पी सीखा हमने, बीज शान्ति के बोना.
कौन रहा धरती पर भैय्या, किस के साथ गई है,
दो पल का है रेंन बसेरा, फिर हम सबको भागना.
हम धरती के लाल, और यह हम सबका आवास है.
हम सबकी हरियाली धरती, हम सबका आकाश है.
क्या हिन्दू, क्या रूसी चीनी, क्या इंग्लिश अफगान,
एक खून है सबका भैय्या , एक सभी की साँस है.
उर को बना विशाल ,प्रेम का पावन दीप जलाओ,
सीमाओं को बना असीमित, अन्तःकरण सँवारना.
मेरे देश की माटी, सोना ...........
~~ आनंद विश्वास ~~
_______________________________________
Subscribe to:
Posts (Atom)
-
कवियित्री :- सुभद्रा कुमारी चौहान यह कदम्ब का पेड़ अगर माँ होता यमुना तीरे , मैं भी उस पर बैठ कन्हिया बनता धीरे,धीरे... ले देती यदि बांसुरी...
-
उठो, धरा के अमर सपूतों। पुन: नया निर्माण करो। जन-जन के जीवन में फिर से नव स्फूर्ति, नव प्राण भरो। नई प्रात है नई बात है नया किरन है, ज्योति ...
