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Wednesday, June 11, 2014

Mujhe Sangharshrat rehne do - Sanjay Kirar

मुझे संघर्षरत रहने दो
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मुझे संघर्षरत रहने दो
अभी हवाओ की डोर थामी है
मौसमों से कहने दो
मुझे संघर्षरत रहने दो ...

तलवों ने अभी रेत चूमी
जिज्ञासा अभी इर्द हिर्द घूमी है
अंगड़ाई लेकर रूह जागी अभी
इसे प्रातः की पहली किरण छूने दो
मुझे संघर्षरत रहने दो ...

इतनी प्यास की समुन्दर सूख जाए
इतिहास आज खुद से ऊब जाए
जीवन मरण की सेज बिछाकर
कुछ कर्त्तव्य अर्पित करने दो
मुझे संघर्षरत रहने दो ...

माना घनी रात है उजाला नहीं
प्रेरणा दीप से कब डरा धुधलका नहीं
एक दीप ही सही आंधियो में
प्रेरणा के नाम प्रज्वलित रहने दो
मुझे संघर्षरत रहने दो ...
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संजय किरार

Friday, October 25, 2013

Andhakaar aur main - Sanjay Kirar

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 अन्धकार और मैं
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मैं जब से अंधेरों में चलने लगा हूँ

उजालो से डरने लगा हूँ

जब अँधेरे ने मुझे पहली दफा छुआ

मैं डरा, सहमा

अरे ये ! क्या हुआ

मेरी आँखे चुप थी जुबा बेजुबा बन गई

रास्ते गुम थे,

मंजिल पर पहुंचना सज़ा बन गई

सन्नाटा एक दम सन्नाटा ...........

अचानक एक पल ने मुझे,

अपना मतलब सिखा  दिया

जब मुझे रूबरू अपने दिल से करा दिया

रास्ते बीहड़ो से अपने आप खुल गए

उस दिन जाना,

मेरे कुछ बिछड़े पल मुझसे कैसे जुड़ गए

और सपनो की बागडोर उन अंधेरो के हवाले कर गए।

              -संजय किरार
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