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Sunday, June 17, 2012

Sarhad - Ankita Jain


सरहद 
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सरहद की हर हद पर तुम हो,
दुश्मन की हर जिद पर तुम हो !
लेते हैं जो स्वतंत्र सांस हम,
उस हर सांस के रक्षक तुम हो !

कभी कारगिल में रखवाली,
या हो बम्बई की गोली-बारी !
इनसे जो बेफिक्र बनाये,
उस हर सोच के रक्षक तुम हो !

धरती कांपे या आये सुनामी,
हो जीवन की आँखों में पानी !
हर मुश्किल से राहत देकर,
उस राहत के रक्षक तुम हो !

करते हैं झुककर सलाम हम,
तुम हो तो न कभी गुलाम हम !
कभी जो खाए डर हम सब को,
उस ज़ालिम डर के भक्षक तुम हो !

~~ अंकिता जैन ~~
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Saturday, June 16, 2012

suraj ne kaha - Ankita Jain "Bhandari"

सूरज ने कहा
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सूरज ने कहा उस बदरी से,
              ज़रा अपनी रजाई तो हटाओ !
सारी रात तेरे आघोष में सोया हूँ,
               अब तो मेरे रंगों को बिखराओ !
खिलने जाने दो मेरी ये धूप,
               तड़प रही है जिसे पाने को धरती !
पिघल जाने दो ये ओस की बूँदें ,
               जो सारी रात है तुमने बिखेरी  !
बाकि हैं खिलनी अभी,
                मेरे इंतज़ार में कलियाँ !
सुबह की राह तकती,
                सूनी पड़ी हैं गलियां !
ना फैलाओ ये अँधियारा,
               होकर यूँ उदास !
मैं फिर वापस आऊंगा,
               अब थोड़ा तो मुस्कुराओ !
सूरज ने कहा उस बदरी से,
              ज़रा अपनी रजाई तो हटाओ !!


~~ अंकिता जैन "भंडारी "~~
 

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Wednesday, April 27, 2011

Chahat Ki Tapish - Ankita Jain (Bhandari)


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चाहत की तपिश - अंकिता जैन
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निकलता है लेकर चाहत-की-तपिश,
कि कभी तो उसका दीदार होगा !
पूरी होगी इन निगाहों की ख्वाहिश,
और पलकों को आराम होगा !

गुज़रता है वक़्त पर जब,ना मिलती कोई आहट !
तो बेसब्र किरणों में भी ,बड़ती है गर्माहट !!
सुलझा सा मन अब बसेरा उलझे ख़यालों का होगा,
मिलेगा दीदार या फिर आलम बेवफ़ाई का होगा !
पूरी होगी आखों की ख्वाहिश और पलकों को आराम होगा !!

अब तक ना आई, कोई खबर !
सिमटने लगी है अब, हर तरफ बिखरी नज़र !!
पर वो दीवाना आज फिर यही कहकर आख़िरी साँस लेगा -
मेरे इंतज़ार का सिलसिला ना कभी ख़तम होगा!
कल आऊंगा फिर इसी उम्मीद में उसका दीदार होगा !!
पूरी होगी आँखों की ख्वाहिश और पलकों को आराम होगा !!

~~ अंकिता जैन~~
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Tuesday, April 12, 2011

Anna hazare ki awaaz - Ankita Jain (Bhandari)


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एक आवाज़ -  अंकिता जैन (भंडारी)

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अन्ना हज़ारे की उठती आवाज़,
सत्ता पर जैसे गिरी हो गाज़ !
बुना उन्होंने ने एसा फंदा,
सरकार को जिसने कर दिया नंगा !!

पर हम भी सरकार से कम नहीं,
बिन  अलार्म जगते नहीं !
कभी गाँधी जी तो कभी अन्ना हज़ारे,
चलते नहीं कभी हम बिना सहारे !!

देर से ही सही मगर अब तो नींद से जागो,
खाना पानी छोड़कर अब बस अन्ना के पीछे भागो !
ना रखना डर मन में की नौकरी जाएगी ,
क्यूंकि घोटाले ऐसे ही बड़ते रहे, तो वो ऐसे भी नहीं बच पायेगी !!

जरुरत है अब स्वप्न निद्रा तोड़ने की,
आगे बढकर हाथ से हाथ जोड़ने की !
अन्ना हज़ारे को हमारी नहीं बल्कि हमे उनकी ज़रूरत है,
दिखाना है मिलकर सरकार को क्या लोकतंत्र है !!

~~ अंकिता जैन ~~
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Thursday, April 7, 2011

Ji Le Phir Zindagi - Ankita Jain

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 जीले फिर ज़िन्दगी - अंकिता जैन "भंडारी"
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हो न तू उदास और होसला न खो,
होते नहीं मायने बसंत के गर पतझड़ न हो !

बन जाओ बागवां अपने जीवन की बगिया के,
महकादो रंग बिरंगे फूल खुशियों के ,
पर न होना उदास जब काटें आयें,
होते नहीं मायने गुलाब के गर काटें न हों !

समेट ले अब बिखरी खुशियाँ कुछ इस तरह,
पिरोये हों माला में फिर मोती जिस तरह,
पर न होना कभी उदास गर फिर वो धागा टूटे,
होते नहीं मायने बुलंदी के गर कमजोरी न हो !

दुनिया के इस सागर में सबको तेरा मान,
ना बांध रिश्तों को बंधन में, ना पराया जान,
मुस्कुरादे कुछ ऐसे की वो किसी की ख़ुशी बन जाये,
होते नहीं मायने मुस्कान के गर आँसूं ना हों !

~~ अंकिता जैन "भंडारी" ~~
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Abhi Tak Baaki Hai - Ankita Jain "Bhandari"

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अभी तक बाकी है - अंकिता जैन
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इन थकती आँखों में, अब भी सपने बाकी हैं,
ढलते सूरज की किरणों में, अब भी गर्माहट बाकी है |
लुट गया था वो, जब तेरा साथ छूटा,
पर उस हसीन साथ का अहसाह अभी तक बाकी है ||

तेरी मदहोश आँखों में जाने क्यूँ वो ऐसा खोया,
भुलाकर खुदको, था उसने हसीं ख्वाब संजोया |
डूब चूका था वो, जब तेरी आँखें मुंदी,
पर उन ख्वाबों के खंडर अभी तक बाकी हैं ||

तेरे लफ़्ज़ों में जाल में वो कुछ ऐसा फसा था,
अथपर था वो जाने ये केसे फंदा बुना था |
टूटकर मिट गया वो, जब वो जाल सुलझा,
पर उस जाल के चिपके रेशे अभी तक बाकी हैं ||

ढलने लगी है अब रात और थमने लगी हैं पलकें,
पर इन पलकों पर बिखरे मोती अभी तक बाकी हैं |
इन थकती आँखों में, अब भी सपने बाकी हैं,
ढलते सूरज की किरणों में अब भी गर्माहट बाकी है |

अंकिता जैन
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Thursday, March 10, 2011

Haal-e-Dil - Kritika Jain "Bhandari"

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हाल ए दिल - कृतिका जैन(भंडारी)
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हाल क्या है मेरा,
तुम्हे ये सुनाऊ कैसे !
ज़ख्म मेरे दिल में भी हैं,
तुम्हे वो दिखाऊ कैसे !!

हर पल तेरी आँख से निकले,
यूँ दर्द के किस्से !
मगर कुछ हमने भी खोया है,
तुम्हे ये दिखाऊ कैसे !!






मेरी हर बात का तुमने,
गलत मतलब रखा !
राज़ अब उस बात का मैं,
तुम्हे समझाउं कैसे !!

तुमने तो कह दिया,
धोखा मिला तुम्हे प्यार में !
पर तेरे दिल में भी बेवफाई थी ,
तुम्हे ये जताऊ कैसे !!



~~ कृतिका जैन (भंडारी) ~~
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