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Monday, February 28, 2011

Prarthana Bhartiya Neta Ki - Shrawan Kumar Dwivedi "Arya"

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प्रार्थना भारतीय नेता की - : श्रवण कुमार द्विवेदी "आर्य"
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हे प्रभो आतंकदाता, टिकिट हमको दीजिये
शीघ्र सारे विरोधियों को दूर हमसे कीजिये
व्यभिचारी, कष्टकारी, मैं दुराचारी बनूँ
छल कपट हिंसा अनीति का मैं पदकधारी बनूँ
गाडी बँगला बैंक बैलेंस साल की इनकम बढे
भ्रष्टाचार के इस बाज़ार में शेयर मेरा ऊपर चढ़े
जनता जनार्दन की कृपा हम पर सदा होती रहे
करके मुझपे वो भरोसा विकास से हाथ धोती रहे
भ्रष्टाचार करता रहूँ और प्रभु जी क्या कहूं
आतंकराज में हाथ ना कांपे रिश्वत सदा लेता रहूँ
अबकी बार पी. एम. बनूँ मैं बनके वो सरकार दूँ
खून चूसे जो सभी का ऐसा भ्रष्टाचार दूँ
देश सेवा स्वार्थ मिश्रित ही सदा मेरी रहे

देश लूटूं देश खाऊं, भ्रष्ट गंगा को कर जाऊं |
 
~~ आर्य ~~
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Daulat ka nasha - Shrawan Kumar Dwivedi "Arya"

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दौलत का नशा - श्रवण कुमार द्विवेदी "आर्य"

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आज ये दौलत का कैसा नशा छा रहा है
ईमान डगमगा रहा है
इसे पाने के लिए इन्सान इन्सान को खा रहा है
अब सब कुछ दौलत में सिमट गया है
इसकी रफ़्तार में ईमान का दामन घिसट गया है
इज्ज़त, ईमान, इंसानियत
कुछ नहीं बचा सब ख़तम हो गया
यहाँ पैसे के बाज़ार में सब रद्दियों के भाव तुल गया
झूठ, फ़रेब, अत्याचार, बेईमान
सब शान से सर हिला रहे हैं
पैसे की आड़ में इंसानियत को खा रहे हैं
जिसको देखो वही इसके पीछे भाग रहा है
अपना काम साध रहा है
और भ्रष्टाचार अपनी सीमा लाँघ रहा है
अबला की इज्ज़त, नेताओं का राष्ट्रप्रेम
युवाओं का जोश, बुद्धिजीवियों की सोच,
जनता का वोट, खिलाडियों का खेल
सब कुछ यहाँ कौड़ी के भाव बिकता है
आवाम का ईमान यहाँ नोटों में तुलता है

~~ आर्य ~~

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