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Thursday, April 7, 2011

Darta hoon main - Gaurav Mani Khanal


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डरता हु मैं
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कहता नहीं किसी से,
डरता हु 
मैं
 आपने आप से,
नहीं बोलता हु 
मैं
 आपने ही दिल से,
डरता हु मैं इस दिल की चाहत से,

मन तो बहुत करता है बनाऊ कोई  दोस्त,
पर डरता हु 
मैं
 दोस्त की बेवफाई से,
नही बोलता हु 
मैं
 किसी अनजान से,
डरता हु किसी को आपना बनाने से,

प्यार नही करता किसी से,
डरता हु दिल टूटने के दर्द से,
नही जानता विश्वास का मतलब,
डरता हु इस दगाबाज़ ज़माने के चालो से,

नही चाहता मुस्कुराना है,
डरता हु हँसी के पीछे छुपे गम से,
नही जानता जीतना मै,
डरता हु हार के लम्बे हाथो से,

खुल के जीना भूल गया है,
डरता हु काल की मार से,
भूल गया जिंदगी के मायने मै,
डरता हु आने वाले कल के भार से,

भावहीन है चेहरा मेरा,
डरता हु कोई पढ़ ना ले डर को मेरे,
शब्द नही है मेरे मन के कोष मे,
डरता हु मन की वेदना किसी को कहने से,

डरता हु मै हार पल के बदलाव से,
जीवन परिवर्तन के सिधांत से.....

~ गौरव मणि खनाल~
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Maa - Gaurav Mani Khanal

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माँ
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पल पल बदलते इस संसार मे,
हर रिश्ते को बदलते देखा,

प्यार को तकरार मे,
अपनो को अंजानो मे बदलते देखा,
दूप को छाव मे,
छाव को दूप मे बदलते देखा,
बचपन को जवानी मे, और अब
जवानी को भी ढलते देख रहा हु,
पर इन सब बदलाव एक बिच,
एक साथ कभी ना बदला,
मेरी माँ का साथ कभी ना बदला,
छोड़ गए जब सब तनहा,
दोस्त बनकर माँ साथ आई,
टुटा जब मन कोई सपना,
हमदर्द बनकर माँ मेरे साथ रोई,
खाया धोखा इस दिल ने जब,
प्यार लेकर सारे संसार का माँ आई,
कभी जब मन अशांत अधीर हुआ,
धीरज ले आँचल मे माँ आई,
हर मुश्किल हार परेशानी मे,
होसला नया लेकर माँ आई,
डगमगाए कदम जब भी मेरे इस जीवन दौड़ मे,
साहरा बनकर साथ मेरी माँ आई,
लगने लगी जब जिंदगी एक बोझ,
उम्मीद नयी लेकर माँ आई,
कब जब हार से टुटा दिल,
प्रेणना नयी बनकर माँ आई,
कभी जब रोया सोच जीवन की आप धापी,
शांति लेकर गोद मे मेरी माँ आई,
नहीं ऐसा कोई पल इस जीवन मे,
जब माँ का साथ ना मिला हो,
कैसी भी परिस्तिथि  हो,
हर  परिस्तिथि मे रूप बदल बदल साथ मेरी माँ आई,
बेमानी होगा माँ के उपकारो को शब्दों मे ढालना,
नहीं कोई शब्द इस दुनिया मे जो दे माँ को कोई उपमा,
नहीं होगा मुमकिन जीना,
कभी माँ मेरी जो रूठ गयी,
पर जानता हु मे ये भी सच है,
जाना है हम सबको एक दिन,
नियम कठोर विधाता ने बनाया है,
बस मांगता हु इतना ही उस भगवन से,
गर दे जन्म आगे फिर कभी मुझे,
मिले जन्म इस्सी माँ की कोख से मुझे..

~~ गौरव मणि खनाल ~~
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Thursday, March 24, 2011

Tere Bina Main tanha - Gaurav Mani Khanal


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तेरे बिन मे तनहा..
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           फिर आई रात तनहा,
           जगमगाते तारे अनेक पर शांत चद्रमा तनहा,
           और उस दुध्लाती रौशनी मे,
           तनहा चाँद तो निहारता मेरा मन तनहा,

           तरो की टीम टीम की बीच,
           भुझा भुझा मेरा दिल तनहा,
           और इस जगमगाती महफ़िल मे,
           तेरे हाथो का साथ खोजते मेरे हाथ तनहा,

           ठंडी मधुर पुर्वा के साथ आई तेरी खुशबू,
           तेरे ही ख्यालो मे डूबे मन को कर गयी तनहा,
           और इस मनोरम बेला मे,
           तेरा साथ खोजती मेरे दिल की धड़कन तनहा,

           यु तो है सब संगी साथी मेरे साथ,
           पर जैसे एक राधा के बिन गोपियों के बीच श्याम तनहा,
           एसे ही  तेरा ना होना प्राण प्रिये ,
           कर देता है मुझको तनहा,

           लौट आओ प्रियतम जल्दी,
           तुम बिन हो गए है मेरे सपने भी तनहा,
           नैनो मे तुम्हारी चाहत इस कदर बसी है,
           दिन हो या रैन केवल तुम्हारी रहा तकते है ये तनहा...

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~~गौरव मणि  खनाल~~

Thursday, March 17, 2011

Holi Aayi - Gaurav Mani Khanal

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!! होली आई !!
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होली तो भाई रंगों का त्यौहार है, पर यह सिर्फ रंगों तक सिमित नहीं , यह तो वो त्यौहार है जिसने भारत को रंगों के चादर तले  न जाने कब से एक प्यार भरे सूत्र से बांधे रखा है, भाई बेहेन हो, या फिर जोरू और गुलाम ,या फिर देवर साली का मामला ही क्यूँ न हो...सभी को इस होली का रंग खूब भाता है |वो होली की धूम, वो जगह जगह लोगों का जमावड़ा|सच कहा है किसी ने , होली का रंग सिर्फ कादो तक सिमित नहीं..उनकी पहुच हमारे दिल तक होती है, वह हर भाव को बिन कहे बयां करने के सक्षम होते है| और फिर बच्चों का तो कहना ही क्या, वह तो सुबह से किचेन की खिडकियों पे टकटकी लगाये रखते हैं की कब वो पल आये जब उन्हें वो सुनहरे रंगों से सुसज्जित गुजियों के दर्शन हो | भाई बच्चों की ही क्या , हम सभी गुजियों के प्रति कितनी रुझान रखते है ये भी कोई कहने की बात है..इस दिन को शाम में वो अपने दोस्तों के यहाँ जाना , उनसे अनेक बातें कहना सुनना, वो हसी मज़ाक , यह सब और बहोत कुछ | सही पूछो तो भाईचारे के सन्देश को हर घर तक पहुचाने वाला सर्वश्रेष्ठ उपाय है यह त्यौहार | तो मिल कर भाईचारे से , चलो मनाये होली |


सभी लोगो को कवितापुस्तक के तरफ से होली की शुभ कामनाएं !!

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आया फाल्गुन का महिना आया,
आया बसंत झूमता आया,
खिलने लगी फुलवारी सारी,
लगने लगी धरती न्यारी,

रंगों का त्योहार आया,
चुलबुले रंगों के साथ खुशियों का पैगाम आया,
होली आई होली आई,
लेकर उत्साह और उमंग होली आई,

ब्रज मे नन्द नंदन ने टोली बनायीं,
बरसाने से राधा रानी सखिया संग आई,
अवध मे सीता संग होली खेले रघुराई,
भोले बाबा ने गौरी संग कैलाश मे पिचकारी चलाई,

मधुर बेला निराली आई,
होली की रंगों से सारी धारा खिलखिलाई,
झूमा धरती अम्बर सारा,
होली की गीतों ने ऐसी धूम मचाई,

घर घर गुजिया और मिठाई,
हर घर मे गूंज रही होली की बधाई,
होली के रंगों से सारी दुरियाँ मिटाई,
गले मिल मिल शुभकामनाये देते हिन्दू मुस्लिम सिख इसाई,

नए पुरने दोस्तों ने आवाज़ लगाई,
भर भर खुशियों की पिचकारी चलाई,
सतरंगी रंगों ने ऐसा रंग जमाया,
परायो को भी आपना बनाया,

बसंत बहार होली के रंगों का साथ,
लाये सबके जीवन मे इन्द्रधनुषी फुहार,
यारो की टोलिया आपनो का साथ,
मुबारक आपको होली का त्योहार..

~~ गौरव मणि खनाल ~~


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Monday, March 14, 2011

Hare Krishna - Gaurav mani khanal

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हरे कृष्णा!! - गौरव मणि खनाल
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जीते जी बताया नहीं,मरने पर करे पुकार,
अब कहै क्या होए, जब यम ले गए प्राण!!
हरे कृष्णा!!

प्रेम परिभाषा सब जाने, प्रेम जाने ना कोए,
जो नर कोई प्रेम को जाने, वो प्रेममूर्ति बन जाये!!
हरे कृष्णा!!

संसार मे है सुख खोजता, खोजे पराये घर,
आपने घर कभी ना खोजा, जहा रहते परमानन्द!!
हरे कृष्णा!!

उठाकर भोर के साथ, लियो राम को नाम,
दिन भर छल कपट कियो, मुर्ख सोचे अंत काल मिलेंगे राम!!
हरे कृष्णा!!

माया पीछे भागे, लियो ना हरी का नाम,
अब शरीर सुस्त हुआ, पुकारे राम राम!! 
हरे कृष्णा!!

बुरे कर्मो का फल, नरक के द्वार दिखाये,
अच्छा कर्म कर ले बन्दे, राम मिलेंगे सहाय!!
हरे कृष्णा!!

लालच ने मन को खाया, काम खा गया ह्रदय,
अब राम को कहा बैठाऊ, सोचु मै दिन रैन!!
हरे कृष्णा!!

परमानंद की खोज मै घूमा चारो धाम,गंगा नहाया पर मिले नही राम,
ढाई अक्षर प्रेम के पढ़े,सहज मिले सीता राम!! 
हरे कृष्णा!!

चाहे पढो वेद सारे या रखो रोजे सारे,
नहीं मिलते राम-रहीम जानो ना जब तक प्रेम के ढाई अक्षर पुरे!! 
हरे कृष्णा!!

चिंता मै दिन गए,रोये गईं रैन, नाम हरी का ना लिया,
हाय लुट गया सुख चैन!!
हरे कृष्णा!!

हरी नाम का सत्संग, तन मन निर्मल बनाये,
अधम भी साधु भये, हरी नाम की रटन लगाये!! 
हरे कृष्णा!!

देख संसार का छल, मेरो मन दियो मुस्काए,
हार सुबह एक दिन काम होता जिंदगी का,फिर भी सुभ्प्रभात कहलाये!!
हरे कृष्णा!!

करले बन्दे कुछ कर्म ऐसा, जनम सफल हो जाये,
मानव तन मिला भाग्य से, यु ही व्यर्थ क्यों गवाए!! 
हरे कृष्णा!!

~ गौरव मणि खनाल~
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Saturday, February 26, 2011

Meri Ma - Gaurav Mani Khanal

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मेरी माँ: गौरव मणि खनाल
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                           कहने को बहुत है आपने,
                           पर तेरे जैसा कोई नही यहाँ,
                           प्यार तो मुझसे सब करते है,
                           पर तेरे जैसा दुलार नही यहाँ,
                           मेरी माँ..

                           है सब कुछ इस शहर मे,
                           पर बिन तेरे लगता है सब सुना यहाँ,
                           घर तो बसा लिया मैंने,
                           पर तेरे बिन सब अधुरा यहाँ,
                           मेरी माँ..

                            हार तरह स्वाद का खाना मिलता शहर मे,
                            पर तेरे हाथो से बनी रोटी सा स्वाद नही यहाँ,
                            सोने के लिए मखमली बिस्तर है,
                            पर तेरी थाप्लियो के बिना नीद नही यहाँ,
                            मेरी माँ..

                            हौसला देने वाले बहुत है,
                            पर सच मे आंसू पोछे ऐसा कोई नही यहाँ,
                            चेहरे के भावों को सब पढ़ते,
                            पर तेरी तरह मेरे मन को पढ़े ऐसा कोई नही यहाँ,
                            मेरी माँ..

                            आराम करने के लिए सब सुविधा है,
                            पर तेरे अंचल की ठंडक नही यहाँ,
                            दोस्तों की गपसप है,
                            पर तेरी कहानियो वाली बात नही यहाँ,
                            मेरी माँ..

                            सब ख़ुशी चाहते है,
                            पर कोई ख़ुशी नहीं देता यहाँ,
                            खुदगर्जो के शहर मे,
                            तेरे बिन बहुत अकेला हु मै यहाँ,
                            मेरी माँ..

                           क्यों दूर कर दिया किस्मत ने मुझे तुझसे,
                           तेरे बिन बहुत तनहा हु मै यहाँ,
                           आती है हार पल याद तेरी,
                           तेरे बिन दिल नहीं लगता अब मेरा यहाँ,
                           मेरी माँ..

                           बहुत आराम की जिंदगी है इस बड़े शहर मै,
                           पर सच ये है रोता हु रात को अकेले मै यहाँ,
                           तेरी यादो का सहारे कट रही है जिंदगी है,
                           वरना नहीं देता मेरा मन भी मेरा साथ यहाँ,
                           मेरी माँ..

                           तुझे देखने को दिल मेरा धड़कता है,
                           तुझसे लिपटने को मन मेरा तड़पता यहाँ,
                           तेरे कोमल हाथो का स्पर्श खोजते है सूखे हुए गाल मेरे,
                           तेरी गोद मै सर रख कर सोने को तरसता हु मै यहाँ,
                           मेरी माँ..

                           पता है मुझे रोती है तू भी अकेले मै,
                           जैसे सिसकता है दिल मेरा अकेले मै यहाँ,
                           जनता हु तसरती है तू मिलने को मुझे,
                           जैसे तडपता हु मै मिलने को तुझे मै यहाँ,
                           मेरी माँ..

                           सोचता हु कैसे कर दी मैंने इतनी बड़ी भूल,
                           कुछ सुखो के लिए चला आया इतनी दूर,
                           अब जब अकेला और तनहा हु यहाँ,
                           समझा मै जिंदगी की बात यहाँ,
                           सुख वही है जहा है मेरी माँ,


~~ गौरव मणि खनाल ~~

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Friday, February 25, 2011

Ek ajnabi - Gaurav Mani Khanal

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 एक अजनबी : ~गौरव मणि खनाल~

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                         आज दिल फिर उदास है,
                   आज मिला हार का एक और इनाम है,
                   सपना टुटा, मन रूठा,

                   जग हुआ वीरान है,
                   अचानक झुके हुए कंधो पर,एक स्पर्श हुआ,
                   मुड कर देखा तो, एक अजनबी का दीदार हुआ,
                   उसके उज्जवल चेहरे पर मुस्कान का साथ था,
                   उसकी मुस्कान कुछ कह रही थी,

                   मेरे हताशा भरे मन को हौसला दे रही थी,
                   उसके चेहरे की उज्जवलता ,

                   उम्मीद नयी जगा रही थी,
                   उस अजनबी का साथ दिल को भा रहा था,

                   अजनबी से रिश्ता नया बना रहा था,
                   फिर कुछ देर ख़ामोशी रही, 

                   एक दुसरे को पहचाने ने की कोशिश रही,
                   अचानक अजनबी ने चुप्पी तोड़ी,
                   क्यों उदास को प्यारे, क्यों बैठे हो जोश को हारे,
                   क्या हुआ जो आज हारे!!
                   कल सवेरा फिर आएगा ,नयी रौशनी लायेगा,
                   शायद आज कुछ सिखने का दिन है,

                   हार से जीवन रथ को धकेलने का दिन है,
                   एक नयी रहा बनाने का दिन है ,

                   हार से जीत की और जाने का दिन है,
                   हार से हार ना मनो, 

                   हार को जीत का सहभागी मनो,
                   जीत की परेणा का साथ ना छोड़, उम्मीद ना छोड़,
                   जीत मिलेगी संशय ना कर,

                   आपने जोश को ठंडा ना कर,
                   तुझे कौन हरा सकता है, तुझे कौन झुका सकता है,
                   तू तो परमशक्ति परमत्मा की संतान है,

                   शिक्तियो का भंडार उर्जा की खान है,
                   तू प्रेम की प्रकास्टा और इस संसार की जान है,
                   तू संसार की बिना नही, संसार तेरे बिना वीरान है,
                   अजनबी की बातो ने मानो सारा दुःख खीच लिया,
                   शांत हुए मन मै, जीत का बीज रोप दिया,
                   दिल फिर से खिल उठा, मुख फिर मुस्कुरा उठा,
                   अजनबी जाने को तयार है,

                   मेरे मन मै अब बस एक सवाल है,
                   अजनबी कौन है कहा से आया है,
                   अजनबी मेरा मन जान गया,

                   और जाते जाते बस इतना बोल गया,
                   मै अजनबी नहीं तेरा पिता हु, 

                   मै ही परमशक्ति परमत्मा हु,
                   तू मुझे भूल गया तो क्या हुआ, 

                   मै सदा ही तेरे के साथ हु,
                   अब कभी हारे तो दुःख ना करना,

                   आपने जीवन को वीरान ना करना,
                   कोई मुस्किल आये, शांत हो कर मुझे याद करना,
                   मै आऊंगा और तुझे रह दिखाऊंगा!!!
  

                                    ~गौरव मणि खनाल~


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Thursday, February 24, 2011

Kuch Aisa Kar Jaunga | Gaurav Mani Khanal

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कुछ ऐसा कर जाऊंगा - गौरव मणि खनाल 
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जीवन पथ पर चलता चला जा रहा हु,
कभी सोच कर कभी बिना सोचे, कदम बढाये जा रहा हु,
जाना कहा है नहीं जनता हु, क्या पाना है नहीं पहचानता हु,
लेकिन हार मोड़ पर उम्मीद नयी जोड़ता हु,
हारना नहीं है,ये नदिया की धार से सीकता हु,
नदिया पर्वत के ह्रदय से निकलती है, आपना रास्ता आप बनती है,
कोई बाधा कोई अवरोध आये,नदिया नही रूकती
अविरल बहती जाती है, और अंत मै आपनी मजिल पाति है,
अनंत सागर मै समां जाती है,
पर अनंत से मिलने से पहले, धरती को आपनी निर्मल धारा से सीच जीवन दे जाती है,
मै भी एक नदिया जैसा बनुगा, आपना रास्ता आप बनाऊंगा,
हरूँगा नहीं रुकुंगा नहीं, अविरल बढ़ता जाऊंगा,
आपनी मजिल पाउँगा, एक दिन उस अनंत शक्ति मे मिल जाऊंगा,
पर आपने विलय से पहले, याद रखेगी ये धरती मुझको,
सत्कर्म ऐसा कर जाऊंगा, आपना नाम अमर कर जाऊंगा !!!

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~गौरव मणि खनाल ~ 
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Monday, February 21, 2011

मेरे मन की बात - गौरव मणि खनाल Mere Man Ki Baat - Gaurav mani Khanal

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कभी कोई मेरे दर्द को भी समझे,
दिल के पिंजरे में बंद मेरे अरमानो को समझे,
उड़ना चाहता हूँ मै भी खुले आकाश मै,
कोई मेरे मन के भावों को समझे |

थक चूका हु मै दुनिया के साथ चल कर,
कोई मेरा हाथ पकड़ मुझे नयी रहा दिखा दो,
बिक गए है मेरे अरमान दुनिया के बाज़ार मे,
कोई मेरे अरमानो को फिर से जगा दो |

नए सपनों को देखने से  डरता है अब मन मेरा,
नए रास्तो मे चलने से थकता है अब तन मेरा,
प्रेम गीत गाने से मौन है अब दिल मेरा,
सोचता हु इस खुदगर्ज़ दुनिया मे कौन है अब अपना मेरा,


खो गया हु कही मै झूठ और बेईमानी के फेरे मै,
हर चेहरा हंस रहा है जूठी हँसी इस मेले मे,
मे भी उन जूठे चेहरों मे शामिल एक चेहरा हूँ ,
मुख से दीखता भोला पर अन्दर मन से मैला हूँ ,

अब ऊब कर इस जूठे भोले पन से,
आपने मन मे फेले इस मल से,
चाहता हु अब निर्मल करना इस धूमिल मन को,
पवित्र करना चाहता हु इस जीवन धन को,
बहुत जी लिया दुनिया के विचारो के साथ,
बहुत रुक लिया पाने आपनो का हाथ,

अब सव्छंद और स्वतंत्र करना,
              चाहता हु इस तन मन को,
जीना चाहता हूँ अब ऐसे,
             दे सकू प्रेरणा आने वाले कल को ..

                                      
            ~ गौरव मणि खनाल ~

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