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Friday, September 6, 2013

Samanta - Milap Singh Bharmouri

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समानता 
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या मै  अनपढ़ हूँ
इसलिए मुझे बात समझ नही आती
या वो बडबोला है
बस वह बोलने का ही है  आदि

वो कहता है यहाँ पर
हर आदमी समान है
मै कहता हूँ के वह
इस दुनिया से ही अनजान है

या वो अनजान है
या अनजानेपन का ढोंग करता है
या मानसिकता कलुषित है
या उसके मन में
कोई रोग पलता है

क्या वो अँधा है
रोज उसे अपने महल से निकलते
रास्ते में मेरी झुग्गी दिखाई नही देती
क्या वो बहरा है
उसे मेरे भूखे बच्चे की
रोने की आवाज सुनाई नही देती

वो अक्क्सर कहता है
कभी अखवारों में
कभी टी. वी. पे
कभी भूखों की भीड़ में
इन्ही बाजारों में
कि यहाँ पर सब इन्सान बराबर है


- मिलाप सिंह भरमौरी 

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Sunday, August 14, 2011

Samay Dhara – Gaurav Mani Khanal

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Sun       समय धारा       Clock

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समय की धारा मे बहता जा रहा हु,
कोई डर नहीं मन मे है,
निर्भीक हो के चला जा रहा हु,
किनारों की कोई खबर नहीं,
बस जैसे जैसे समय धारा चलती,
मुझको भी चलते जाना है,
मंजिल कहा मेरी किसको पता,
कल कहा लेजायेगी धारा किसको पता,
मुझे तो आज ही मौज मानना है,
बस जैसे जैसे समय धारा चलती,
मुझको भी चलते जाना है,
कभी छल छल करती बहती धारा,
कभी शांत स्थिर रहती है,
मै भी धारा के संग बदलता हु,
कभी मुस्कुराता तो कभी रोता हु,
बस जैसे जैसे समय धारा चलती,
मुझको भी चलते जाना है,
आज देश कल परदेश लेजाती है,
कभी सुख कभी दुःख दिखाती है,
सुख दुःख देश परदेश घुमते हुए,
मुझे आपनी अनदेखी मजिल पानी है,
बस जैसे जैसे समय धारा चलती,
मुझको भी चलते जाना है,
आपनी मजिल को पाना है
बस जैसे जैसे समय धारा चलती,
मुझको भी चलते जाना है...


In love  गौरव मणि खनाल  Hot smile ~

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Tuesday, March 8, 2011

Maanav Kaaya - Ankesh Jain

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मानव काया

अंकेश जैन
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कुछ तत्वों का संगम है

कुछ नियमो की शक्ति है

मानव काया इस श्रृष्टि की

एक अनोखी गुत्थी है


आयामों की सीमा में यह

सदा मध्य में आती है

जितनी छोटी आकाश गंगा से

अणु को उतना पीछे पाती है


सदियों के विकसित क्रम का यह

परिणाम अनोखा लगता है

रहे समय के किसी दौर में

सदा ज्ञान को तकता है


भाव, बिभाव, शक्ति, सौन्दर्यता

जीवन के आयाम यहाँ

ध्येय ज्ञान है, लक्ष्य ज्ञान है

जीवन में विश्राम कहा

~~ अंकेश जैन ~~
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