Showing posts with label तरुवर. Show all posts
Showing posts with label तरुवर. Show all posts

Sunday, January 16, 2011

Taruvar - Ankesh Jain तरुवर - अंकेश जैन

_________________________________________________


एक पेड़ का पत्ता
टूटा डाली से जा बिखरा
माँ के आँचल में जा निखरा
ले चली पवन यह किस ओर
कैसा है यह शोर


सपनो का वो बादल

प्यारा सा था वो तरुवर
सूरज की किरणो ने बेधा
मेरे अन्तर्मन का शोर 
ले चली पवन यह किस ओर

उठती है सपनो की लहरें
गिरते है संशय के परदे
तूफा की धारा में बहकर
तय करने है मीलो के पहरे
ले चली पवन यह किस ओर

अंधियारे की बस्ती
मिटती नहीं मिटाये हस्ती
जीवन के अनमोल क्षणॊ को देकर
पाए है शब्दो के मोल
ले चली पवन यह किस ओर...



                                   _ अंकेश जैन


_________________________________________________